Ex Judges on Youth Congress Protest: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (India AI Impact Summit 2026) के दौरान राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एक विरोध प्रदर्शन ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। भारतीय युवा कांग्रेस (Indian youth congress) के कुछ सदस्यों ने कार्यक्रम स्थल के अंदर कथित तौर पर शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया। इस घटना के बाद देश की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। भारतीय जनता पार्टी सहित कई दलों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया है।
Ex Judges on Youth Congress Protest: 277 पूर्व जज और अधिकारियों ने जताई नाराजगी

इस पूरे मामले पर अब 277 पूर्व न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिकारियों ने एक संयुक्त पत्र जारी कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। पत्र में इस प्रदर्शन को अनुचित और राष्ट्रीय गरिमा के खिलाफ बताया गया है। बयान का शीर्षक ‘राष्ट्रीय कलंक’ रखा गया, जिसमें कहा गया कि इस तरह का व्यवहार किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक संगठन को शोभा नहीं देता। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में न्यायमूर्ति एसएन ढ़िगरा और बीएल वोहरा जैसे पूर्व अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में इस प्रकार का प्रदर्शन देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता है।
Congress Shirtless Protest: वैश्विक मंच पर देश की छवि पर सवाल
पत्र में कहा गया है कि यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण तकनीकी और राजनयिक मंच था, जहां दुनिया के बड़े तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योगपति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भारत की प्रगति को देखने और समझने के लिए एकत्रित हुए थे। ऐसे समय में इस तरह का विरोध प्रदर्शन करना देश की छवि को कमजोर करने जैसा है।
पूर्व अधिकारियों का कहना है कि जब भारत खुद को एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब इस तरह की घटनाएं गलत संदेश देती हैं। इससे विदेशी निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के बीच अस्थिरता का संकेत जा सकता है।
AI Summit: सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

बयान में यह भी कहा गया कि प्रदर्शन करने वाले कथित रूप से क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर कार्यक्रम स्थल में प्रवेश कर गए। अगर यह सही है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। एक सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम स्थल में इस प्रकार प्रवेश कर नारेबाजी करना और शालीनता की सीमाओं को पार करना चिंताजनक बताया गया है। पूर्व अधिकारियों ने इसे साधारण विरोध नहीं, बल्कि सुनियोजित कदम बताया। उनका कहना है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन उसका तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
India AI Impact Global Summit: लोकतांत्रिक विरोध बनाम अनुशासन
पत्र में साफ कहा गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध एक वैध अधिकार है। लेकिन यह अधिकार अराजकता फैलाने या देश का सार्वजनिक रूप से अपमान करने की अनुमति नहीं देता। सच्चा राजनीतिक विरोध विचारों, बहस और संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए, न कि ऐसे प्रदर्शनों के जरिए जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश को असहज स्थिति में डाल दें। पूर्व जजों और अधिकारियों ने इस घटना को युवाओं की समझदारी का अपमान बताया। उनका कहना है कि जो संगठन युवाओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं, उन्हें जिम्मेदारी और परिपक्वता भी दिखानी चाहिए।
राजनीति और राष्ट्रहित की सीमा
बयान में यह भी कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों को आंतरिक राजनीतिक विवादों का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। राजनीति को देशहित की सीमा में रहकर किया जाना चाहिए। ऐसे आयोजनों में देश की सामूहिक उपलब्धियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि दलगत लाभ को।
अंत में, हस्ताक्षरकर्ताओं ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे ऐसी राजनीतिक संस्कृति को अस्वीकार करें जो राष्ट्रीय उपलब्धियों को विवाद और तमाशे में बदल देती है। उनका कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं किसी एक सरकार को नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की छवि को प्रभावित करती हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि लोकतांत्रिक विरोध की मर्यादा क्या होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीतिक आचरण की सीमाएं कैसे तय की जाएं।
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