तिरुवनंतपुरम, 25 जून (आईएएनएस)। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा पार्षदों के शपथ ग्रहण को लेकर चल रहा राजनीतिक और कानूनी विवाद गुरुवार को उस समय और गहरा गया, जब निगम कार्यालय में सत्तापक्ष और विपक्षी पार्षदों के बीच तीखी झड़प हो गई। इस दौरान एक महिला पार्षद घायल हो गईं।
विवाद उस समय बढ़ गया जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम नगर निगम के मेयर वी.वी. राजेश निगम कार्यालय पहुंचे। उस समय वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के पार्षद भाजपा पार्षदों के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
एलडीएफ का आरोप है कि 19 भाजपा पार्षदों को दोबारा शपथ दिलाने की प्रक्रिया अनियमित थी और इससे मेयर तथा डिप्टी मेयर का चुनाव अमान्य हो गया है। इसी मांग को लेकर एलडीएफ पार्षदों ने मेयर कार्यालय का घेराव कर रखा था।
जब मेयर राजेश कार्यालय में प्रवेश करने लगे तो एलडीएफ पार्षदों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद भाजपा पार्षद बीच में आ गए और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने में पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।
इस दौरान कट्टायिकोनम वार्ड की सीपीआई(एम) पार्षद सिंधु ससी के सिर में चोट लग गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहीं भाजपा नेताओं का दावा है कि झड़प में उनके कई पार्षदों और स्वयं मेयर को भी चोटें आई हैं।
कार्यालय में प्रवेश करने के बाद मेयर वी.वी. राजेश ने विपक्ष पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को किसी निर्वाचित मेयर को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा, “सामान्य नागरिकों को भी कार्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया गया। किसी लोकतांत्रिक संस्था में इस तरह की हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
यह विवाद बुधवार को आए केरल हाईकोर्ट के फैसले के बाद और बढ़ गया। हाईकोर्ट ने उन 20 भाजपा पार्षदों की शपथ को निरस्त कर दिया था, जिन्होंने निर्धारित वैधानिक प्रारूप के बजाय अपने-अपने आराध्य देवताओं और शहीदों के नाम पर शपथ ली थी।
अदालत के निर्देश के बाद इन पार्षदों ने कुछ ही घंटों के भीतर दोबारा “ईश्वर के नाम पर” शपथ ग्रहण कर ली।
हालांकि एलडीएफ और यूडीएफ दोनों का कहना है कि दोबारा शपथ दिलाने की प्रक्रिया बिना उचित सूचना और विपक्षी पार्षदों की अनुपस्थिति में पूरी की गई, इसलिए यह प्रक्रिया भी नियमसम्मत नहीं मानी जा सकती।
विपक्षी दलों का तर्क है कि 20 पार्षदों की नई पात्रता का असर मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव के समय निगम परिषद की संरचना पर पड़ता है, इसलिए उन चुनावों को भी अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। विपक्ष ने दोनों पदों के लिए नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है।
फिलहाल यह मामला कानूनी प्रक्रिया से आगे बढ़कर बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। एलडीएफ पार्षद निगम कार्यालय में क्रमिक भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
–आईएएनएस
डीएससी
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