महाराष्ट्र विधान परिषद में भाजपा ऐतिहासिक बहुमत के करीब, विपक्ष के पद को लेकर खींचतान हुई तेज

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मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महाराष्ट्र विधानसभा के ऊपरी सदन में एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरी है। वहीं विपक्ष में दल-बदलू नेता (एलओपी) के पद को लेकर आंतरिक कलह में उलझे हुए हैं। वर्तमान में सक्रिय 73 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास अकेले 35 सीटें हैं, जो उसे अपने दम पर पूर्ण बहुमत के करीब ले जा रही हैं। महाराष्ट्र की संसद में भाजपा एक निर्विवाद शक्ति के रूप में उभरी है। हाल ही में हुए सीट पुनर्गठन के बाद किसी भी विधायी विधेयक को पारित करना…

मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महाराष्ट्र विधानसभा के ऊपरी सदन में एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरी है। वहीं विपक्ष में दल-बदलू नेता (एलओपी) के पद को लेकर आंतरिक कलह में उलझे हुए हैं।

वर्तमान में सक्रिय 73 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास अकेले 35 सीटें हैं, जो उसे अपने दम पर पूर्ण बहुमत के करीब ले जा रही हैं।

महाराष्ट्र की संसद में भाजपा एक निर्विवाद शक्ति के रूप में उभरी है। हाल ही में हुए सीट पुनर्गठन के बाद किसी भी विधायी विधेयक को पारित करना भगवा पार्टी के लिए अब कोई मुश्किल काम नहीं रह गया है, जिससे संसद में उन्हें प्रभावी रूप से तुरंत लाभ मिल गया है।

78 सदस्यीय विधान परिषद में साधारण बहुमत के लिए 39 सीटों की आवश्यकता होती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि अगर राज्यपाल द्वारा मनोनीत शेष पांच सीटें शीघ्र भर दी जाती हैं, तो भाजपा अकेले ही बहुमत के करीब पहुंच सकती है।

राज्यपाल द्वारा परंपरागत रूप से मनोनीत की जाने वाली कुल 12 सीटों में से सात सीटें पहले ही भरी जा चुकी हैं। शेष पांच रिक्त सीटों में से सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे की चर्चाओं से संकेत मिलता है कि भाजपा को तीन सीटें मिलेंगी, जबकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को एक-एक सीट मिलने की संभावना है।

यदि ये नियुक्तियां संपन्न हो जाती हैं, तो भाजपा की व्यक्तिगत सीटों की संख्या 35 से बढ़कर 38 हो जाएगी, जो कि पूर्ण बहुमत से केवल एक सीट कम है।

इस साल के अंत तक, स्नातक और शिक्षक सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव होंगे। राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा के लिए पुराने राजनीतिक हिसाब चुकता करने और अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने का सुनहरा अवसर मानते हैं। अगर पार्टी इन 5 सीटों में से 3 सीटें भी जीत लेती है, तो उसकी सीटों की संख्या 40 से अधिक हो जाएगी, जिससे उसे अपने दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त हो जाएगा।

यह वृद्धि विधान परिषद के तीव्र विस्तार का संकेत है। महज दो महीने पहले सदन में केवल 47 सक्रिय सदस्य थे, जिससे सदन की संख्या काफी कम हो गई थी। हालांकि, मई में राज्य विधानसभा के माध्यम से 9 सदस्यों की नियुक्ति और उसके बाद स्थानीय प्राधिकरणों के निर्वाचन क्षेत्रों से 17 सदस्यों की नियुक्ति से सदन की संख्या बढ़कर 73 हो गई है।

इस बीच, राजनीतिक गठबंधन लगातार बदलते रहते हैं। नासिक स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल करने वाले निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गीते ने आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं, जिससे पार्टी की विधायकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।

अध्यक्ष पद पर पहले से ही भाजपा के राम शिंदे काबिज हैं। उपाध्यक्ष पद के लिए इस सप्ताह निर्णय आने की उम्मीद है और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की डॉ. नीलम गोरहे के इस पद पर वापसी करने की प्रबल संभावना है।

जहां एक ओर सत्ताधारी गठबंधन अपनी शक्ति को मजबूत कर रहा है। वहीं विपक्ष आंतरिक कलह में उलझा हुआ है।

कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) दोनों ने विपक्ष के रिक्त पद पर अपना मजबूत दावा पेश किया है। मौजूदा सत्र के शुरुआती दिनों में विपक्ष की पीठ का नेतृत्व कौन करेगा, इस पर कोई फैसला होने की संभावना नहीं है।

–आईएएनएस

एसएचके/वीसी

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