कैबिनेट ने संशोधित उड़ान स्कीम को 28,840 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ मंजूरी दी, 100 एयरपोर्ट्स विकसित होंगे

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नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुधवार को केंद्र सरकार के बजटीय सहयोग से 28,840 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ 10 वर्षों की अवधि के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना(आरसीएस)-संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दी गई। संशोधित उड़ान योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 की अवधि के लिए मंजूर किया गया है। इस निर्णय से कम सेवा प्राप्त और सेवा से वंचित क्षेत्रों में क्षेत्रीय हवाई संपर्क में सुधार होगा। साथ ही टियर 2 और टियर 3 शहरों में आर्थिक विकास, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा…

नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुधवार को केंद्र सरकार के बजटीय सहयोग से 28,840 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ 10 वर्षों की अवधि के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना(आरसीएस)-संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दी गई।

संशोधित उड़ान योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 की अवधि के लिए मंजूर किया गया है।

इस निर्णय से कम सेवा प्राप्त और सेवा से वंचित क्षेत्रों में क्षेत्रीय हवाई संपर्क में सुधार होगा। साथ ही टियर 2 और टियर 3 शहरों में आर्थिक विकास, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

इससे आम नागरिकों के लिए किफायती हवाई यात्रा को भी सहायता मिलेगी और दूरस्थ एवं पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार होगा।

इसके अलावा, यह योजना क्षेत्रीय हवाई अड्डों और एयरलाइन संचालकों के लिए अधिक व्यवहार्यता और स्थिरता सुनिश्चित करने में सहायक होगी, आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत स्वदेशी एयरोस्पेस क्षेत्र को बढ़ावा देगी और ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी।

संशोधित उड़ान योजना के तहत, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए मौजूदा बिना सर्विस वाली हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डों का विकास प्रस्तावित है। इस योजना पर अगले आठ वर्षों में कुल 12,159 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) के अंतर्गत आने वाले हवाई अड्डों के उच्च आवर्ती परिचालन और रखरखाव लागत तथा सीमित राजस्व स्रोतों को देखते हुए, योजना के तहत तीन वर्षों के लिए परिचालन एवं रखरखाव सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति हवाई अड्डा 3.06 करोड़ रुपए प्रति वर्ष और प्रति हेलीपोर्ट/जल हवाई अड्डा 0.90 करोड़ रुपए प्रति वर्ष है। लगभग 441 हवाई अड्डों के लिए अनुमानित कुल राशि 2,577 करोड़ रुपए है।

इसके अतिरिक्त, पहाड़ी, दूरस्थ, द्वीपीय और विकासशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए, योजना के तहत 15 करोड़ रुपए प्रति हेलीपैड की लागत से 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसकी कुल लागत अगले आठ वर्षों में (मुद्रास्फीति समायोजित) 3,661 करोड़ रुपए होगी। यह योजना प्राथमिकता प्राप्त और विकासशील जिलों पर केंद्रित है, ताकि अंतिम-मील कनेक्टिविटी और आपातकालीन प्रतिक्रिया में सुधार किया जा सके।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के तहत, एयरलाइन ऑपरेटरों को आवंटित मार्गों पर परिचालन के लिए विजिबिलिटी फंड (वीजीएफ) के रूप में वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।

कैबिनेट के अनुसार, बाजार के दीर्घकालिक विकास की आवश्यकता को देखते हुए, एयरलाइन ऑपरेटरों को 10 वर्षों में 10,043 करोड़ रुपए की वीजीएफ सहायता देने का प्रस्ताव है।

छोटे स्थिर-पंख वाले विमानों और हेलीकॉप्टरों की कमी को दूर करने के लिए, इस योजना में पवन हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए दो एचएएल डोर्नियर विमान खरीदने का भी प्रस्ताव है।

–आईएएनएस

एबीएस/

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