तिरुवनंतपुरम, 26 सितंबर (आईएएनएस)। केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) टीका राम मीणा ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग के अन्य दो सदस्यों की राय को नजरअंदाज करते हुए फॉर्म 6 से जुड़े बदलाव लागू करने में मनमाना रवैया अपनाया।
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी मीणा ने शनिवार को कहा कि उन्होंने बैचमेट्स ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को पत्र लिखकर चुनाव आयोग के फैसले लेने के तरीके पर कई मतभेदों की ओर इशारा किया था।
मीणा ने कहा, “चुनाव आयोग स्वतंत्र फैसले ले रहा है। तीन सदस्यों के मामले में, बहुमत की राय को माना जाना चाहिए लेकिन ज्ञानेश ने मनमाने ढंग से काम किया।”
उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म 6 में किए गए बदलाव ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ और ‘चुनाव नियम, 1961’ के खिलाफ थे। कानूनी असर वाले बदलाव सिर्फ एक कार्यकारी आदेश के जरिए नहीं किए जा सकते।
मीणा ने कहा कि बाकी दो चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ अपने मतभेदों को दर्ज करने का पूरा अधिकार था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से बदलाव किए गए, उससे चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता की कमी दिखी।
पूर्व चुनाव अधिकारी ने कहा कि एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के तौर पर चुनाव आयोग को सामूहिक रूप से और कानून के अनुसार फैसले लेने चाहिए।
मीणा ने कहा, “चुनाव आयोग किसी भी तरह के दबाव में नहीं आ सकता, यहां तक कि प्रधानमंत्री के दबाव में भी नहीं, क्योंकि उन्हें पूरी सुरक्षा (इम्युनिटी) मिली हुई है।”
टीका राम मीणा ने कहा कि यह मामला सिर्फ कमिश्नरों के बीच अलग-अलग राय का नहीं है, बल्कि इसमें कानूनी प्रावधानों और तय प्रक्रियाओं को जिस तरह से लागू किया जा रहा है, वह भी शामिल है।
मीणा की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के कामकाज पर लोगों की कड़ी नजर है। इसकी वजह आयोग के भीतर मतभेद और वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने की प्रक्रिया में किए गए बदलाव हैं।
–आईएएनएस
ओपी/वीसी
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