ओडिशा के सीएम मोहन माझी ने स्कूल की किताबों में गलतियों पर की बड़ी कार्रवाई, 4 अधिकारी निलंबित

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भुवनेश्वर, 26 जून (आईएएनएस)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में हुई गलतियों के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। यह कार्रवाई विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद की गई। समिति ने स्कूल की किताबों में हुई गलतियों की जांच की थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर मुख्यमंत्री ने इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। इस मामले में शिक्षक शिक्षा निदेशालय…

भुवनेश्वर, 26 जून (आईएएनएस)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में हुई गलतियों के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।

यह कार्रवाई विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद की गई। समिति ने स्कूल की किताबों में हुई गलतियों की जांच की थी।

समिति की सिफारिशों के आधार पर मुख्यमंत्री ने इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं।

इस मामले में शिक्षक शिक्षा निदेशालय तथा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पूर्व निदेशक मनोज पाधी तथा तीन सहायक निदेशक- प्रलिप्ता मिश्रा, दिलीप कुमार साहू और भारती टुडू को निलंबित कर दिया गया है।

इसके अलावा छह सहायक निदेशकों बंदिता पटनायक, मानस रंजन राउत, मनोरंजन महापात्र, डॉ. प्रशांत कुमार साहू, मानस कुमार नायक और डॉ. सुदर्शन संतरा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।

समिति ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और पाठ्यपुस्तकों की गलतियों को दूर करने के लिए 14 सुझाव भी दिए हैं। सीएमओ ने बताया कि समिति की सभी 14 सिफारिशों को राज्य सरकार लागू करेगी।

इनमें एससीईआरटी द्वारा सात दिनों के भीतर एक मास्टर त्रुटि रजिस्टर (एराटा रजिस्टर) तैयार करना, सभी छात्रों तक सही जानकारी पहुंचाना, गंभीर गलतियों वाले पन्नों को बदलना या दोबारा छापकर उपलब्ध कराना और सभी छात्रों को छपे हुए सुधार पत्र वितरित करना शामिल है।

तीन सदस्यीय समिति ने यह भी सिफारिश की है कि सुधार की गई पीडीएफ कॉपी को आधिकारिक शिक्षण प्रति घोषित किया जाए, शिक्षकों के लिए तुरंत सुधार संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं और एक सार्वजनिक एराटा पोर्टल बनाया जाए।

उच्चस्तरीय समिति ने डीटीपी एजेंसी, प्रिंटिंग प्रेस और मंजूरी देने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने की भी सिफारिश की है। साथ ही एससीईआरटी में एक क्वालिटी एश्योरेंस सेल बनाने का भी सुझाव दिया गया है।

समिति ने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी पाठ्यपुस्तक को भाषा, विषय-वस्तु, चित्रों और अन्य सभी पहलुओं की सही जांच और मंजूरी के बिना छपाई के लिए नहीं भेजा जाएगा।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 18 जून को विकास आयुक्त अनु गर्ग की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। समिति को कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों में हुई गलतियों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी।

नई प्रकाशित किताबों में कुल 1,678 गलतियां मिली थीं। इनमें सबसे ज्यादा 705 गलतियां कक्षा 8 की किताबों में पाई गईं। इनमें ‘जिज्ञासा’ में 294, संस्कृत में 114, सामाजिक विज्ञान में 25, साहित्य में 31 और अंग्रेजी व गणित की किताबों में भी कई गंभीर गलतियां शामिल थीं।

–आईएएनएस

एएमटी/वीसी

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