मुंबई, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिग्गज फिल्ममेकर सिंगितम श्रीनिवास राव के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ-साथ राजनीतिक जगत की कई बड़ी हस्तियां भी उन्हें श्रद्धांजलि दे रही है। इस कड़ी में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गहरा दुख जताया। दोनों नेताओं ने उन्हें सिनेमा का ऐसा कलाकार बताया, जिसने अपनी अलग सोच के जरिए फिल्ममेकिंग को नई दिशा दी।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा, ”सिंगितम श्रीनिवास राव का निधन तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री और भारतीय सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अलग-अलग तरह की कहानियों और नए आइडिया के जरिए सिनेमा को समृद्ध किया। उनकी फिल्मों ने पर्दे पर कई तरह की कहानियां पेश की और तेलुगु सिनेमा के लिए नए रास्ते खोले।”
रेवंत रेड्डी ने कहा, ”सिंगितम श्रीनिवास राव ने हमेशा प्रयोगों को बढ़ावा दिया और इसी सोच के साथ कई यादगार फिल्में बनाईं। उन्होंने अपने काम से सिनेमा के इतिहास में ऐसी छाप छोड़ी, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। निर्देशक के अलावा लेखक, विचारक और कलाकार के तौर पर भी उनका योगदान बेहद खास रहा। सिनेमा के प्रति उनका जुनून और समर्पण हमेशा याद किया जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने दिवंगत फिल्ममेकर के परिवार, फैंस और सिनेमा प्रेमियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना भी जाहिर की।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी सिंगितम श्रीनिवास राव के निधन को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा, ”नेल्लोर जिले के उदयगिरि में जन्मे सिंगितम श्रीनिवास राव ने अपने काम के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाई और लंबे समय तक उसका मार्गदर्शन किया। बड़े पर्दे पर उन्होंने जिस तरह के प्रयोग किए, उन्हें दर्शकों की खूब सराहना मिली। वह भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हो, लेकिन दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शांति दें।”
बता दें कि पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने भी सिंगितम श्रीनिवास राव को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, ”सिंगितम श्रीनिवास राव मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद करीबी थे। वह जिस सम्मान और स्नेह के साथ मिलते थे, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। सिंगितम जैसे लोग बहुत कम होते हैं, क्योंकि सिनेमा में उनका हर कदम अपने आप में खास था।”
उन्होंने कहा, ”सिंगितम श्रीनिवास राव ने दर्शकों की नब्ज को समझने के साथ-साथ अपने समय से एक कदम आगे की सोच रखी और करीब चार पीढ़ियों के दर्शकों को अपनी फिल्मों से प्रभावित किया। उन्होंने एक कहावत को साबित किया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। सोच में समय के साथ नई ताजगी आनी चाहिए। उनका करियर सिर्फ एक फिल्म निर्देशक का करियर नहीं था, बल्कि वह एक तरह की ‘सिनेमाई प्रयोगशाला’ थी। उन्होंने युवाओं के लिए यह मिसाल छोड़ी कि बदलते समय के साथ किस तरह नए प्रयोग किए जा सकते हैं और भीड़ में खोए बिना अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।”
–आईएएनएस
पीके/एएस
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