हैदराबाद, 11 सितंबर (आईएएनएस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (केटीआर) ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने राज्य में एक करोड़ से अधिक एकड़ जमीन को धारा 22ए के तहत प्रतिबंधित भूमि सूची में शामिल कर दिया है।
केटीआर ने बीआरएस मुख्यालय तेलंगाना भवन में धारा 22ए से प्रभावित भूमि मालिकों से मुलाकात के दौरान यह आरोप लगाया। बैठक में बीआरएस नेता हरीश राव, पार्टी के विधायक और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
केटीआर ने दावा किया कि बीआरएस सरकार के कार्यकाल में केवल 16 लाख एकड़ जमीन ही प्रतिबंधित सूची में थी, लेकिन नई सरकार के सत्ता में आने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 1 करोड़ 16 लाख एकड़ हो गया।
बीआरएस पहले भी राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को हटाने की मांग कर चुकी है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने निजी संपत्तियों को मनमाने ढंग से धारा 22ए के तहत फ्रीज कर दिया है। यह धारा राज्य सरकार को कुछ विशेष भूमि और संपत्ति दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाने का अधिकार देती है।
मुख्य विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि राजस्व और पंजीकरण तंत्र का दुरुपयोग करते हुए निजी संपत्तियों को मनमाने तरीके से धारा 22ए के तहत शामिल किया जा रहा है। बीआरएस नेताओं का कहना है कि धारा 22ए का उद्देश्य केवल कानूनी रूप से प्रतिबंधित संपत्तियों के पंजीकरण पर रोक लगाना है, न कि वैध निजी संपत्तियों पर कृत्रिम स्वामित्व विवाद खड़े करना या नागरिकों के वैध लेन-देन को रोकना।
केटीआर ने दावा किया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए प्रभावित लोगों ने उन्हें बताया कि बीआरएस सरकार के दौरान उनकी जमीनों को लेकर कोई समस्या नहीं थी, लेकिन कांग्रेस सरकार बनने के बाद उनकी जमीनों पर अतिक्रमण शुरू हो गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की कथित अनियमितताओं का खुलासा होने वाला था, इसलिए बीआरएस विधायकों को विधानसभा से निलंबित किया गया।
केटीआर ने कहा कि वर्ष 2014 में तेलंगाना में जमीन खरीदने को लेकर लोगों में आशंकाएं थीं, लेकिन के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के मुख्यमंत्री बनने के बाद जमीन की कीमतें 5 लाख रुपये प्रति एकड़ से बढ़कर 50 लाख रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गईं, जिससे लोगों ने भूमि में निवेश किया।
बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में राज्य में बड़े पैमाने पर भूमि घोटाले हो रहे हैं और मुख्यमंत्री के भाइयों पर जमीनों की लूट में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी को लेकर विवाद के कारण एक मंत्री को पद से हटाया गया।
केटीआर ने आरोप लगाया कि राज्य में समानांतर राजस्व व्यवस्था चल रही है और आदिवासी जमीनों को भी हड़पने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सरकार पर हैदराबाद के बीचोंबीच स्थित औद्योगिक जमीनों को बेचने का आरोप लगाते हुए कहा कि मूसी नदी सौंदर्यीकरण परियोजना के नाम पर हजारों एकड़ जमीन बेची जा रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ‘फ्यूचर सिटी’ में 200 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन मुख्यमंत्री के भाई से जुड़ी एक कंपनी को केवल 7 करोड़ रुपये में दे दी गई। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सिरसिल्ला विधानसभा क्षेत्र के समुद्र लिंगापुरम गांव में 800 एकड़ जमीन को भी प्रतिबंधित सूची में डाल दिया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
–आईएएनएस
डीएससी
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