बेंगलुरू, 19 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को विधान सौधा में जिला पंचायतों के उपायुक्तों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) की एक बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें राज्य भर में मौजूदा सूखे की स्थिति की समीक्षा की गई और इससे उत्पन्न प्रमुख चुनौतियों से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई।
मीटिंग में पीने के पानी की सप्लाई, जानवरों के लिए चारे की उपलब्धता, खेती-बाड़ी के काम, रोजगार पैदा करने और सूखे से प्रभावित इलाकों में लागू किए जाने वाले दूसरे राहत उपायों से जुड़े मुद्दों पर फोकस किया गया।
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, मंत्री केजे जॉर्ज, रामलिंगा रेड्डी, ईश्वर खंड्रे और यतींद्र सिद्धारमैया मीटिंग में शामिल हुए।
चीफ सेक्रेटरी शालिनी रजनीश, मुख्यमंत्री के इकोनॉमिक एडवाइजर एलके अतीक, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी तुषार गिरिनाथ और गौरव गुप्ता के साथ-साथ सीनियर सरकारी अधिकारी भी मौजूद थे।
रिव्यू के दौरान मुख्यमंत्री ने डिप्टी कमिश्नर और जिला पंचायत चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर्स को टीम कर्नाटक के तौर पर काम करने और पूरे राज्य में सूखे से राहत के उपायों को असरदार तरीके से लागू करने का निर्देश दिया।
विधान सौधा के कॉन्फ्रेंस हॉल में सूखे की स्थिति पर एक मीटिंग को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वह कागजी कामों के बजाय फील्ड रिपोर्ट पर भरोसा करेंगे और अधिकारियों को लापरवाही के खिलाफ चेतावनी दी।
उन्होंने कहा, “अगर फील्ड रिपोर्ट और अधिकारियों की जमा की गई रिपोर्ट में कोई अंतर पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।”
सीएम ने कहा कि कर्नाटक में अभी 60 प्रतिशत बारिश की कमी है, जिससे 178 तालुका प्रभावित हुए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से अगले 15 दिनों के अंदर पूरा डेटा इकट्ठा करने को कहा, ताकि केंद्र को सूखे की रिपोर्ट जमा करने में आसानी हो।
मुख्यमंत्री ने पीने के पानी की कमी को दूर करने के लिए हर ग्रामीण तालुका के लिए एक करोड़ रुपए और देने की घोषणा की और अधिकारियों को बारिश के पैटर्न और जलाशय के स्टोरेज लेवल के आधार पर किसानों को खेती के कामों के बारे में गाइड करने का निर्देश दिया।
उन्होंने अधिकारियों को नए बोरवेल की ड्रिलिंग में ट्रांसपेरेंसी पक्का करने के लिए इस प्रोसेस का वीडियो रिकॉर्ड करने का भी निर्देश दिया और चेतावनी दी कि किसी भी नकली या बोगस बोरवेल के दावों के लिए सीईओ सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।
शिवकुमार ने छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा करने की जरूरत पर भी जोर दिया और अधिकारियों से राज्य में सूखे का असेसमेंट करने वाली टीमों को पूरा सहयोग देने को कहा।
डिप्टी चीफ मिनिस्टर और रेवेन्यू मिनिस्टर जी. परमेश्वर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि कर्नाटक में सूखे की बिगड़ती हालत के बीच लोगों या जानवरों को कोई परेशानी न हो।
सीएम की अध्यक्षता में एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए परमेश्वर ने कहा कि राज्य में 68 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है, और 88 तालुकों में ग्राउंडवाटर लेवल गिर गया है।
उन्होंने पीने के पानी की सप्लाई, रोजगार पैदा करने और चारे की उपलब्धता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
परमेश्वर ने अधिकारियों को विकसित भारत-जी राम जी स्कीम के तहत काम में तेजी लाने, हर हफ्ते डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स मीटिंग करने और सूखा राहत उपायों और सेंट्रल मदद को आसान बनाने के लिए ग्राउंड रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया।
–आईएएनएस
डीकेएम/डीकेपी
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