नई दिल्ली/कोझिकोड, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों पर बुधवार को तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विपक्ष ने इस विधेयक को रोकने की बात कही, वहीं बढ़ती चिंताओं के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस पर पुनर्विचार करने के संकेत दिए हैं।
केरल में चर्च के कई प्रमुखों ने केंद्र सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव और लोकसभा सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि इस कानून को पारित होने से रोकने के लिए विपक्ष ‘कोई भी कीमत चुकाने’ को तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने कुछ अहम राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान एक ‘छिपे हुए एजेंडे’ के तहत यह बिल पेश किया है।
उन्होंने यह भी बताया कि केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और असम में चुनावों के चलते विपक्ष के कई सांसद प्रचार में व्यस्त हैं। संसद के सत्र ऐसे समय में नहीं होने चाहिए। फिर भी, आखिरी दिनों में यह बिल जल्दबाजी में पेश किया गया। इसकी ठीक से जांच-पड़ताल नहीं की गई है।
केरल भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सुलह का रुख अपनाते हुए कहा कि बिल का मौजूदा रूप तब तक पास नहीं किया जाएगा, जब तक कि इससे जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस कानून को लोकसभा में पेश करने से पहले चर्चा की जाएगी।
इससे पहले मंगलवार को, कांग्रेस के कई सांसदों को, जो केरल में चुनाव प्रचार कर रहे थे, तुरंत सदन में मौजूद रहने के लिए बुलाया गया।
हालांकि, बुधवार को यह बिल पार्लियामेंट में नहीं आया। वेणुगोपाल ने तर्क दिया कि इन बदलावों से चैरिटेबल और मानवीय संगठनों, खासकर माइनॉरिटी कम्युनिटी से जुड़े संगठनों के काम करने पर रोक लग सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई संस्थान गरीबों के लिए हॉस्पिटल और एजुकेशनल फैसिलिटी चलाने के लिए विदेशी चंदे पर निर्भर हैं।
वक्फ अमेंडमेंट बिल से तुलना करते हुए वेणुगोपाल ने चेतावनी दी कि एक समुदाय को टारगेट करने वाले कदम बाद में दूसरों पर भी लागू हो सकते हैं।
–आईएएनएस
एसडी/एबीएम
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