केरल विधानसभा के पहले बड़े दिन वंदे मातरम पर यूडीएफ सरकार और राजभवन में टकराव

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तिरुवनंतपुरम, 29 मई (आईएएनएस)। केरल की नई गठित विधानसभा के पहले कार्यदिवस पर शुक्रवार को कांग्रेस-नीत यूडीएफ सरकार और राज्यपाल कार्यालय (लोक भवन) के बीच टकराव देखने को मिला। यह विवाद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के नीति संबोधन से पहले वंदे मातरम के गायन को लेकर पैदा हुआ। राज्यपाल के औपचारिक स्वागत के तहत केरल पुलिस बैंड ने ‘वंदे मातरम’ का केवल शुरुआती हिस्सा ही बजाया और बीच में ही उसे रोक दिया, जबकि राजभवन (लोक भवन) ने गुरुवार की रिहर्सल के दौरान निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय गीत को पूरा बजाया जाए। हालांकि राज्य सरकार ने इस निर्देश को…

तिरुवनंतपुरम, 29 मई (आईएएनएस)। केरल की नई गठित विधानसभा के पहले कार्यदिवस पर शुक्रवार को कांग्रेस-नीत यूडीएफ सरकार और राज्यपाल कार्यालय (लोक भवन) के बीच टकराव देखने को मिला। यह विवाद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के नीति संबोधन से पहले वंदे मातरम के गायन को लेकर पैदा हुआ।

राज्यपाल के औपचारिक स्वागत के तहत केरल पुलिस बैंड ने ‘वंदे मातरम’ का केवल शुरुआती हिस्सा ही बजाया और बीच में ही उसे रोक दिया, जबकि राजभवन (लोक भवन) ने गुरुवार की रिहर्सल के दौरान निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय गीत को पूरा बजाया जाए।

हालांकि राज्य सरकार ने इस निर्देश को स्वीकार नहीं किया और लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार केवल शुरुआती हिस्से को ही बजाने पर अडिग रही। इसी वजह से नई यूडीएफ सरकार और राज्यपाल कार्यालय के बीच शुरुआती टकराव के संकेत सामने आए।

राजनीतिक हलकों में इस घटना को सरकार और राजभवन के बीच आने वाले समय में संभावित तनाव के संकेत के रूप में देखा गया। खासकर इसलिए क्योंकि यह घटना विधानसभा के उस पहले बड़े दिन पर हुई जब 139 विधायकों ने शपथ ली थी और नए स्पीकर का चुनाव हुआ था।

140 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस-नीत यूडीएफ सरकार के पास 102 विधायकों का बड़ा बहुमत है, जबकि वामपंथी विपक्ष के पास 35 सीटें हैं। भारतीय जनता पार्टी पहली बार तीन विधायकों के साथ विधानसभा में पहुंची है, जिससे सदन का राजनीतिक स्वरूप बदल गया है।

तनाव के बावजूद राज्यपाल ने विधानसभा में इस मुद्दे को आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत मलयालम में “नमस्कारम्” कहकर की और वंदे मातरम विवाद या सरकार से मतभेद पर कोई सीधा उल्लेख नहीं किया।

हालांकि, इस घटना का राजनीतिक संदेश साफ था। यूडीएफ सरकार यह संकेत देना चाहती है कि वह परंपरा और प्रोटोकॉल से जुड़े मामलों में राजभवन के सामने आसानी से झुकने वाली नहीं है, जबकि राज्यपाल कार्यालय भी सार्वजनिक रूप से निर्देश की अनदेखी को अनदेखा करने के मूड में नहीं दिखता।

दोनों पक्षों ने सार्वजनिक तौर पर संयम दिखाया है, लेकिन अपने-अपने रुख पर दृढ़ता बनाए रखी है। इसी वजह से यह वंदे मातरम विवाद आने वाले समय में सरकार और राजभवन के रिश्तों में तनाव बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।

–आईएएनएस

ओपी/वीसी

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