इंफाल, 22 मार्च (आईएएनएस)। मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह ने रविवार को कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) के नेताओं के साथ अपनी पहली बैठक को राज्य में शांति, सामान्य स्थिति बहाल करने और मेइतेई तथा कुकी-जो समुदायों के बीच विश्वास फिर से बनाने की दिशा में एक ‘अच्छी शुरुआत’ बताया।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को गुवाहाटी में कुकी-जो काउंसिल के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ एक बंद कमरे में बैठक की, जिसके दौरान राज्य से जुड़े कई मुद्दों और मणिपुर में स्थिरता बहाल करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा हुई।
गुवाहाटी वार्ता का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि यह बातचीत, जो लगभग तीन साल में पहली बार हुई है, एक अहम कदम है।
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “केजेडसी और राज्य सरकार के बीच यह बातचीत शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने, साथ ही विभिन्न समुदायों के बीच भरोसा फिर से बनाने की दिशा में वाकई एक अच्छी शुरुआत है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में भी इस तरह की बातचीत जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री ने बातचीत के लिए निमंत्रण स्वीकार करने पर केजेडसी प्रतिनिधिमंडल का आभार भी जताया और कहा कि यह बैठक मुख्य रूप से राज्य में शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।
उन्होंने आगे कहा कि 4 फरवरी को पदभार संभालने के बाद से, उन्होंने लगातार सभी संबंधित पक्षों से “माफ करो और भूल जाओ” के सिद्धांत पर चलते हुए शांति की दिशा में काम करने की अपील की है।
कुकी-जो आदिवासियों के लिए एक अलग प्रशासन या केंद्र शासित प्रदेश की मांग से जुड़े सवालों के जवाब में, सिंह ने दोहराया कि केंद्र सरकार पहले ही अपना रुख साफ कर चुकी है कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता बनी रहेगी।
इससे पहले, 17 मार्च को मुख्यमंत्री कार्यालय ने केजेडसी के अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट को पत्र लिखकर राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए 21 मार्च को गुवाहाटी में केजेडसी प्रतिनिधियों से मिलने की सिंह की इच्छा जाहिर की थी।
रविवार को जारी एक बयान में, केजेडसी ने पुष्टि की कि यह बैठक शनिवार रात गुवाहाटी में हुई और लगभग एक घंटा 45 मिनट तक चली। इसमें कहा गया कि मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच लगभग तीन साल तक चले संघर्ष के बाद, सिंह के नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार और कुकी-जो काउंसिल के बीच यह पहली औपचारिक बातचीत थी।
इस बातचीत को मुख्य रूप से “आइस ब्रेकिंग सेशन” बताते हुए, केजेडसी ने कहा कि उसके प्रतिनिधिमंडल ने कई अहम मुद्दे उठाए, जिन्हें मुख्यमंत्री ने पूरी गंभीरता से सुना।
उठाए गए मुख्य मुद्दों में कुकी और तांगखुल समुदायों के बीच तनाव कम करने की तत्काल आवश्यकता, और किसी भी सार्थक शांति और सुलह प्रक्रिया की पूर्व शर्त के रूप में संघर्ष के पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करने की अनिवार्यता शामिल थी। केजेडसी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जब तक कोई व्यापक राजनीतिक समझौता नहीं हो जाता, तब तक बफर जोन की पवित्रता बनाए रखना जरूरी है।
इसके अलावा, उसने इस क्षेत्र में टिकाऊ और स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए चल रही ‘ऑपरेशन्स के निलंबन’ वार्ताओं के समाधान में तेजी लाने की भी अपील की।
बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अपनी चिंताएं साझा कीं, अपनी सरकार की प्रतिबद्धताओं को रेखांकित किया, और मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का विस्तार से ब्योरा दिया। उन्होंने केजेडसी की पहल और इस चुनौतीपूर्ण दौर में बातचीत में शामिल होने की उसकी इच्छा की भी सराहना की।
बयान में आगे कहा गया है कि हालांकि, यह बैठक बिना किसी औपचारिक निर्णय या समझौते के ही समाप्त हो गई।
–आईएएनएस
एससीएच
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