बेंगलुरु, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के करीबी सहयोगी और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री सतीश जारकीहोली के साथ अपनी मुलाकात को सामान्य बताते हुए इसे तूल देने से इनकार किया।
अल्पसंख्यक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू होने को लेकर पार्टी को मिल रही आलोचना के बीच राज्य कांग्रेस में तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं। ऐसे माहौल में सतीश जारकीहोली ने शुक्रवार सुबह बेंगलुरु के कुमार पार्क स्थित सरकारी आवास पर डीके शिवकुमार से मुलाकात की और चर्चा की।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट बैठक के दौरान कुछ मंत्रियों के समूह ने दो अल्पसंख्यक एमएलसी के खिलाफ कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि इससे मुस्लिम समुदाय पार्टी से दूर हो सकता है। वहीं, एक अन्य समूह ने इस कार्रवाई का समर्थन किया। इसी संदर्भ में शिवकुमार और जारकीहोली की मुलाकात को अहम माना जा रहा है।
मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर डीके शिवकुमार ने कहा, “हमने पार्टी के कामकाज और साथ मिलकर काम करने के तरीकों पर चर्चा की।”
उन्होंने आगे कहा, “वह हमारे नेता हैं और हमें साथ मिलकर काम करना है। हमें 2028 में पार्टी को फिर से सत्ता में लाना है। आप मुझसे नोट कर लें, कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में एक बार फिर सत्ता में आएगी। मुझे इस पर हजार प्रतिशत भरोसा है।”
शिवकुमार ने यह भी बताया कि बैठक में बेंगलुरु में ट्रैफिक समस्या पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा, “मंत्री सतीश और मैं एक ही पार्टी से हैं। हमने इस पर भी चर्चा की कि शहर में आने वाले वाहनों को कैसे डायवर्ट किया जाए। नेलमंगला से गोरगुंटेपलया के बीच करीब 30 मिनट तक जाम रहता है। मैंने इस संबंध में कुछ प्रस्ताव दिए हैं। नाइस जंक्शन से पहले ट्रैफिक कम करने और शहर में अतिरिक्त वाहनों की एंट्री रोकने पर भी विचार किया गया।”
वरिष्ठ विधायकों के दिल्ली दौरे और संभावित कैबिनेट फेरबदल पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, “अभी इस पर बात नहीं कर सकते। पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी होनी है, यही हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और मैं ‘ब्रिक्स टू बेंगलुरु’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे हैं। इसमें विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि, राजदूत और दुनिया भर के प्रतिष्ठित लोग शामिल होंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन आईटी और बीटी मंत्रालय कर रहा है और हम दोनों राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे।”
सूत्रों का कहना है कि डीके शिवकुमार कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि इससे मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की कुर्सी मजबूत हो सकती है। वहीं, सिद्धारमैया खेमे ने वरिष्ठ विधायकों के एक समूह को दिल्ली भेजकर पार्टी नेतृत्व से कैबिनेट फेरबदल की मांग करवाई है।
कैबिनेट से हटाए गए के.एन. राजन्ना और बी. नागेंद्र मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं। वहीं, पार्टी पद गंवाने वाले एमएलसी अब्दुल जब्बार और नसीर अहमद भी मुख्यमंत्री के नजदीकी हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी मंत्री ईश्वर खंड्रे ने कहा, “कांग्रेस नेतृत्व आंतरिक मामलों पर अंतिम निर्णय लेगा।”
उन्होंने कहा कि वह कैबिनेट बैठक से पहले ही निकल गए थे और चर्चा के विवरण से अवगत नहीं हैं। उन्होंने इस मुद्दे को पार्टी का आंतरिक मामला बताते हुए कहा कि हाईकमान ही उचित निर्णय लेगा।
उन्होंने कहा, “इन सभी मामलों को हमारे वरिष्ठ नेता संभालेंगे। मैं सिर्फ एक कांग्रेस कार्यकर्ता हूं। मैं भले ही वरिष्ठ हूं, लेकिन निर्णय लेने का अधिकार हाईकमान के पास है। मुख्यमंत्री और केपीसीसी अध्यक्ष साथ बैठकर पार्टी के हित में फैसला लेंगे।”
खांड्रे ने यह भी कहा कि उन्हें बैठक में अन्य मंत्रियों के विचारों की जानकारी नहीं है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे का समाधान निकाल लेगा।
–आईएएनएस
डीएससी
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