केरल में डेंटल छात्र की मौत पर बवाल, विरोध प्रदर्शन तेज; जांच के आदेश

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कन्नूर, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल के कन्नूर स्थित अंचराकांडी डेंटल कॉलेज के बीडीएस छात्र नितिन राज की मौत ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस घटना के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, कई स्तरों पर जांच के आदेश दिए गए हैं और फैकल्टी पर लंबे समय से उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नितिन राज के सहपाठियों ने विभागाध्यक्ष डॉ. एम.के. राम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि वे नियमित रूप से डराने-धमकाने, बॉडी शेमिंग करने और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न में शामिल थे। छात्रों के मुताबिक, नितिन की…

कन्नूर, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल के कन्नूर स्थित अंचराकांडी डेंटल कॉलेज के बीडीएस छात्र नितिन राज की मौत ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस घटना के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, कई स्तरों पर जांच के आदेश दिए गए हैं और फैकल्टी पर लंबे समय से उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

नितिन राज के सहपाठियों ने विभागाध्यक्ष डॉ. एम.के. राम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि वे नियमित रूप से डराने-धमकाने, बॉडी शेमिंग करने और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न में शामिल थे। छात्रों के मुताबिक, नितिन की मौत से पहले की परिस्थितियां बेहद क्रूर थीं, जिनमें अजीबोगरीब सजा देने की प्रथाएं शामिल थीं, जिससे छात्रों पर मानसिक और शारीरिक रूप से गहरा असर पड़ता था।

छात्रों ने उन शुरुआती खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें आत्महत्या की वजह लोन ऐप के दबाव को बताया गया था। उनका कहना है कि यह कहानी कॉलेज प्रशासन और आरोपी फैकल्टी को बचाने के लिए गढ़ी गई है।

आरोप है कि डॉ. राम आंतरिक अंकों और वाइवा के मूल्यांकन में अपनी पकड़ का इस्तेमाल कर छात्रों को चुप रहने के लिए मजबूर करते थे और फेल करने की धमकी देते थे। छात्रों ने यह भी बताया कि उनके द्वारा सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाता था, यहां तक कि माता-पिता के सामने भी गाली-गलौज की जाती थी। इसके अलावा मारपीट और अपमानजनक सजा देने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं।

घटना के विरोध में छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया है और त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। केएसयू और एमएसएफ के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज तक मार्च किया, जबरन कैंपस में प्रवेश किया और धरना दिया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाकर गिरफ्तार कर लिया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी भी आरोपी शिक्षक को, चाहे उस पर सांप्रदायिक टिप्पणी के आरोप ही क्यों न हों, बचने नहीं दिया जाएगा।

इस बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी इस मामले को उठाते हुए केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके और नेशनल मेडिकल कमीशन को शिकायत सौंपी है। संगठन ने पारदर्शी और व्यापक जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तिरुवनंतपुरम के रहने वाले प्रथम वर्ष के छात्र नितिन ने फैकल्टी द्वारा कथित जातीय और नस्लीय भेदभाव सहित क्रूर व्यवहार के चलते आत्महत्या की।

राष्ट्रीय स्तर पर, भाजपा नेता पी. श्यामराज की शिकायत के आधार पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी जांच के आदेश दिए हैं और राज्य के डीजीपी से पांच दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है।

वहीं, केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने नितिन के परिवार के साथ सरकार के खड़े होने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि मामले की गहन जांच की जाएगी और परिवार को हर संभव सहायता दी जाएगी, जिसमें मुख्यमंत्री से मुलाकात की व्यवस्था भी शामिल है।

पुलिस ने इस मामले में दो एफआईआर दर्ज की हैं, एक अप्राकृतिक मौत को लेकर और दूसरी एक लोन ऐप के खिलाफ। हालांकि दूसरी एफआईआर को लेकर उठे सवालों ने मामले को और जटिल बना दिया है।

पुलिस छात्रों और फैकल्टी के बयान दर्ज कर रही है, जबकि मामले में नामजद निलंबित शिक्षक फरार बताए जा रहे हैं और उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में गिरफ्तारी की आशंका है।

जैसे-जैसे और छात्र सामने आ रहे हैं, इस मामले में जवाबदेही तय करने और उच्चस्तरीय जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

–आईएएनएस

डीएससी

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