कॉकरोच पोस्टर विवाद: केरल हाईकोर्ट ने एमजी यूनिवर्सिटी को नेशनल कॉन्फ्रेंस का फंड रोकने पर लगाई रोक

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कोच्चि, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स यूनियन को अंतरिम राहत देते हुए महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें छात्रों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए मंजूर की गई आर्थिक सहायता को ‘कॉकरोच’ वाले पोस्टर के इस्तेमाल के कारण वापस ले लिया गया था। जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने स्टूडेंट्स यूनियन की उस याचिका पर अंतरिम आदेश दिया जिसमें वाइस-चांसलर के फैसले को चुनौती दी गई थी। विस्तृत आदेश का इंतजार है और मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्टूडेंट्स…

कोच्चि, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स यूनियन को अंतरिम राहत देते हुए महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें छात्रों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए मंजूर की गई आर्थिक सहायता को ‘कॉकरोच’ वाले पोस्टर के इस्तेमाल के कारण वापस ले लिया गया था।

जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने स्टूडेंट्स यूनियन की उस याचिका पर अंतरिम आदेश दिया जिसमें वाइस-चांसलर के फैसले को चुनौती दी गई थी।

विस्तृत आदेश का इंतजार है और मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्टूडेंट्स यूनियन ने यूनिवर्सिटी से पहले से मंजूरी लेकर यूनिवर्सिटी कैंपस में तीन दिन का नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की योजना बनाई।

कॉन्फ्रेंस के लिए 3.75 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मंजूर की गई थी, जिसमें से 2.81 लाख रुपए, यानी कुल राशि का 75 प्रतिशत, पहले ही जारी किया जा चुका था।

याचिका के अनुसार, कॉन्फ्रेंस की तैयारी चल रही थी तभी यूनिवर्सिटी ने एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें कहा गया कि यूनिवर्सिटी के फंड से आयोजित कार्यक्रमों में राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।

सर्कुलर में यूनिवर्सिटी के प्रतीक चिह्न (एम्बलम) के इस्तेमाल के लिए भी पहले से अनुमति लेना जरूरी कर दिया गया।

स्टूडेंट्स यूनियन का तर्क था कि यह सर्कुलर कॉन्फ्रेंस के लिए दो प्रचार पोस्टरों की वजह से जारी किया गया था।

एक पोस्टर में एक कॉकरोच को एक बूट के सामने चुनौती भरे अंदाज में खड़े दिखाया गया था, जबकि दूसरे में एक कॉकरोच को एक बड़े पर्दे को पीछे धकेलते हुए दिखाया गया था।

इसके बाद, स्टूडेंट्स वेलफेयर के डायरेक्टर ने एक नोटिस जारी कर आरोप लगाया कि पोस्टरों में राजनीतिक संदेश थे और उन्होंने महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स कोड ऑफ कंडक्ट रूल्स, 2005 के साथ-साथ यूनिवर्सिटी के अन्य नियमों का उल्लंघन किया था।

स्टूडेंट्स यूनियन के प्रतिनिधि डायरेक्टर के सामने पेश हुए और कहा कि पोस्टरों में भारत के चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा कोई राजनीतिक प्रतीक, पार्टी का झंडा या प्रचार सामग्री नहीं थी।

एक लिखित स्पष्टीकरण भी सौंपा गया।

स्पष्टीकरण के बावजूद, वाइस-चांसलर ने कॉन्फ्रेंस के लिए आर्थिक मंजूरी वापस ले ली, जिसके बाद स्टूडेंट्स यूनियन ने आदेश को रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अब अंतरिम रोक लगने के साथ, यूनिवर्सिटी का फैसला अगले आदेश तक निलंबित रहेगा, जबकि इस बात पर कानूनी लड़ाई जारी रहेगी कि क्या पोस्टर राजनीतिक अभिव्यक्ति थे; यह मामला अगले महीने हाई कोर्ट में फिर से सुनवाई के लिए आएगा।

–आईएएनएस

एससीएच/पीएम

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