केरल को विरासत में 5.07 लाख करोड़ रुपये का कर्ज मिला : सीएम सतीशन

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तिरुवनंतपुरम, 4 जून (आईएएनएस)। गुरुवार को विधानसभा में पेश किए गए राज्य के वित्त पर ‘श्वेत पत्र’ के अनुसार, केरल की नई सरकार को एक गंभीर वित्तीय चुनौती विरासत में मिली है। राज्य पर 5.07 लाख करोड़ रुपए की बकाया देनदारियां हैं, कुल राजस्व प्राप्तियों का 77 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य खर्चों में चला जाता है, और अकेले ब्याज भुगतान ही राजस्व का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा चला जाता है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन द्वारा पेश की गई केरल की वित्तीय सेहत पर स्टेट्स रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका मकसद आलोचना के साथ अतीत को खंगालना नहीं, बल्कि वित्तीय स्थिति…

तिरुवनंतपुरम, 4 जून (आईएएनएस)। गुरुवार को विधानसभा में पेश किए गए राज्य के वित्त पर ‘श्वेत पत्र’ के अनुसार, केरल की नई सरकार को एक गंभीर वित्तीय चुनौती विरासत में मिली है। राज्य पर 5.07 लाख करोड़ रुपए की बकाया देनदारियां हैं, कुल राजस्व प्राप्तियों का 77 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य खर्चों में चला जाता है, और अकेले ब्याज भुगतान ही राजस्व का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा चला जाता है।

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन द्वारा पेश की गई केरल की वित्तीय सेहत पर स्टेट्स रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका मकसद आलोचना के साथ अतीत को खंगालना नहीं, बल्कि वित्तीय स्थिति और आगे आने वाली चुनौतियों का सबूतों पर आधारित आकलन पेश करना है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र से मिलने वाले फंड में कमी, जीएसटी मुआवजे और राजस्व घाटा अनुदान का खत्म होना, निजी निवेश में कमजोर बढ़ोतरी और खर्च की बढ़ती प्रतिबद्धताओं के कारण केरल का वित्तीय संकट और गहरा गया है।

श्वेत पत्र में चेतावनी दी गई है कि केरल उस मूल सिद्धांत से भटक गया है जिसके तहत निवेश के लिए उधार लिया जाता है और फिर विकास से उस उधार को चुकाया जाता है; राज्य में सबसे ज़्यादा राजकोषीय घाटा होने के बावजूद, पूंजीगत खर्च देश में सबसे कम है, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का सिर्फ 1.3 प्रतिशत है।

सरकार के सामने तत्काल चुनौती राजकोष की स्थिति है।

जब राजस्व की आवक खर्च से कम हो जाती है, तो केरल को भारतीय रिजर्व बैंक के उधार लेने के तरीकों पर बहुत ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य 2015 से लगभग हर साल ‘वेज एंड मीन्स एडवांसेज’ (अग्रिम) पर निर्भर रहा है।

हाल के वर्षों में स्थिति और बिगड़ गई है; 2025 में केरल ने 262 दिनों तक ‘वेज एंड मीन्स एडवांसेज’ का लाभ उठाया और 84 दिनों तक ओवरड्राफ्ट पर रहा।

कोविड वाले वर्षों 2020 और 2021 के दौरान, राज्य क्रमशः 234 और 195 दिनों तक ऐसे अस्थायी उधारों पर निर्भर रहा था।

श्वेत पत्र में यह भी बताया गया है कि सरकार को 48,733 करोड़ रुपए का बकाया भुगतान विरासत में मिला है; इसमें 21,670 करोड़ रुपए का लंबित महंगाई भत्ता (डीए) बकाया, 14,387 करोड़ रुपये का महंगाई राहत (डीआर) बकाया और 3,431 करोड़ रुपए शामिल हैं जो बिल डिस्काउंटिंग के जरिए बैंकों और ठेकेदारों को चुकाए जाने हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “यह केरल के शुद्ध वार्षिक उधार के लगभग बराबर है।”

रिपोर्ट में उठाई गई एक बड़ी चिंता सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसई) के कारण पैदा हुआ बोझ है।

केरल में देश में सबसे ज्यादा सरकारी स्वामित्व वाले उद्यम हैं, जिनमें से ज्यादातर घाटे में चल रहे हैं। इन उद्यमों का जमा घाटा 2021-22 में 31,571 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 78,851 करोड़ रुपए हो गया।

रिपोर्ट में बताया गया कि 2024-25 में पीएसई (सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों) के कुल शुद्ध घाटे में केएसआरटीसी, केएसएसपीएल और केरल जल प्राधिकरण का हिस्सा मिलाकर 72 प्रतिशत रहा।

व्हाइट पेपर में केआईआईएफबी जैसी संस्थाओं को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि भले ही इन संस्थाओं ने इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स बनाने में मदद की हो, लेकिन इन्होंने अतिरिक्त देनदारियों और भविष्य के राजस्व प्रवाह पर दबाव बढ़ाने में भी योगदान दिया है।

खराब जीएसटी राजस्व प्रदर्शन (जो राष्ट्रीय औसत से नीचे बना हुआ है) और पिछले दो वर्षों में केंद्र सरकार से मिलने वाली मदद में भारी गिरावट के कारण भी राजकोषीय स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

रिपोर्ट में कई सुधारों का सुझाव दिया गया है, जिनमें राजस्व जुटाने के तरीकों में सुधार करना, राज्य द्वारा संचालित उद्यमों में परिचालन संबंधी अक्षमताओं को कम करना, और उत्पादन-आधारित सब्सिडी से हटकर उपभोग-आधारित सहायता की ओर बढ़ना शामिल है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही हकदार लोगों तक पहुंच सके।

यह व्हाइट पेपर ऐसे समय में आया है, जब सरकार के सामने कल्याणकारी वादों और राजकोषीय सुधारों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है; साथ ही उसे उस जनता की उम्मीदों को भी पूरा करना है, जिसने बेहतर विकास और प्रगति के लिए वोट दिया था।

–आईएएनएस

एससीएच/पीएम

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