तिरुचि, 18 मई (आईएएनएस)। मेट्टूर डैम में पानी के भंडारण स्तर में भारी गिरावट ने तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में ‘कुरुवाई’ खेती को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। किसानों और कृषि विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इस बार 12 जून को पारंपरिक रूप से होने वाला पानी का छोड़ा जाना संभव नहीं लग रहा है।
रविवार को मेट्टूर डैम का जलस्तर 79 फीट दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 108 फीट था। जलाशय में पानी का भंडारण भी घटकर 41.035 टीएमसी (हजार मिलियन घन) रह गया है, जबकि 2025 की समान अवधि में यह 76.031 टीएमसी था।
परंपरा के अनुसार, कुरुवई खेती के लिए मेट्टूर डैम से पानी तभी छोड़ा जाता है, जब जलस्तर 100 फीट से अधिक होता है। मौजूदा भंडारण स्तर इस सीमा से काफी नीचे होने के कारण, यह चिंता बढ़ रही है कि इस साल तय समय पर बांध खोलना शायद संभव न हो पाए। इस घटनाक्रम ने कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
2020 से 2025 के बीच मेट्टूर से पानी आमतौर पर समय पर ही छोड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप बंपर फसलें हुईं और कई वर्षों तक कुरुवाई खेती ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को भी पार कर लिया। इस दौरान ‘सांबा’ खेती भी काफी अच्छी रही।
इस साल सरकार ने खेती के लक्ष्य में भी कमी की है। कुरुवाई खेती का लक्ष्य घटाकर 3.44 लाख एकड़ कर दिया गया है, जबकि 2025 में यह 6.31 लाख एकड़ था। जिलों के हिसाब से तंजावुर में 1.57 लाख एकड़, तिरुवरूर में 97,000 एकड़, मयिलादुथुराई में 87,000 एकड़ और नागपट्टिनम में 59,000 एकड़ का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, पूरे डेल्टा क्षेत्र में कृषि गतिविधियां काफी धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं। बताया जा रहा है कि अब तक निर्धारित लक्ष्य क्षेत्र का केवल 35 प्रतिशत हिस्सा ही खेती के दायरे में आ पाया है।
जिन किसानों ने पहले ही खेती शुरू कर दी है, वे मुख्य रूप से भूजल संसाधनों और बोरवेल पर निर्भर हैं और साथ ही वे अनुकूल दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थितियों की उम्मीद कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि पीने के पानी की जरूरतों के लिए पानी दिए जाने के कारण जून की शुरुआत तक डैम में पानी का स्तर और कम हो सकता है, जिससे सिंचाई की योजना बनाने पर दबाव बढ़ जाएगा।
इसके साथ ही, पानी के बंटवारे के तय नियमों के अनुसार, तमिलनाडु को कावेरी नदी के पानी में से उसका तय हिस्सा दिए जाने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
पानी की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बनी रहने के कारण यह चिंता भी बढ़ रही है कि मौजूदा कृषि सीजन में किसान जोखिम कम करने और संभावित नुकसान को रोकने के लिए अपना ध्यान अधिक से अधिक ‘एक सांबा फसल’ की रणनीति पर केंद्रित कर सकते हैं।
–आईएएनएस
डीसीएच/
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