असम: अदालतों में 57 लाख से अधिक मामले लंबित और 40 न्यायिक पद रिक्त

Summary :

गुवाहाटी, 22 जुलाई (आईएएनएस)। असम के कानून और न्याय मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने बुधवार को चल रहे मानसून सत्र के दौरान राज्य विधानसभा को बताया कि राज्य में अदालतों में 57 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जबकि 40 न्यायिक पद रिक्त हैं। वरिष्ठ कांग्रेस विधायक जाकिर हुसैन सिकदर के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री बोरगोहेन ने कहा कि असम में न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 486 है, जिनमें से 446 पद वर्तमान में भरे हुए हैं और 40 पद रिक्त हैं। मंत्री ने सदन को बताया कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह…

गुवाहाटी, 22 जुलाई (आईएएनएस)। असम के कानून और न्याय मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने बुधवार को चल रहे मानसून सत्र के दौरान राज्य विधानसभा को बताया कि राज्य में अदालतों में 57 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जबकि 40 न्यायिक पद रिक्त हैं।

वरिष्ठ कांग्रेस विधायक जाकिर हुसैन सिकदर के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री बोरगोहेन ने कहा कि असम में न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 486 है, जिनमें से 446 पद वर्तमान में भरे हुए हैं और 40 पद रिक्त हैं।

मंत्री ने सदन को बताया कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने यह भी बताया कि अपर्याप्त बुनियादी ढांचे के कारण कुछ अदालतें अभी तक चालू नहीं हो पाई हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में न्यायिक प्रणाली के कामकाज पर असर पड़ा है।

विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 मई, 2026 तक राज्य भर की अदालतों में लंबित मामलों की कुल संख्या 5,75,541 थी।

इनमें से 1,14,296 दीवानी मामले हैं, जबकि 4,61,245 आपराधिक मामले हैं।

राज्य सरकार ने पिछले पांच वर्षों में अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा निपटाए गए मामलों का विवरण भी साझा किया।

2021 में, न्यायालयों ने 35,536 दीवानी मामलों और 1,46,810 आपराधिक मामलों का निपटारा किया।

2022 में यह संख्या बढ़कर 45,184 दीवानी और 2,26,175 आपराधिक मामले हो गई, इसके बाद 2023 में यह संख्या 45,555 दीवानी और 3,27,728 आपराधिक मामले रही।

2024 में, अधीनस्थ न्यायालयों ने 50,483 दीवानी और 2,33,399 आपराधिक मामलों का निपटारा किया, जबकि 2025 में उन्होंने 53,348 दीवानी और 1,95,636 आपराधिक मामलों का निपटारा किया।

बोरगोहेन ने राज्य विधानसभा को बताया कि असम में वर्तमान में 40 त्वरित न्यायालय और छह विशेष न्यायालय कार्यरत हैं।

हालांकि, असम में कोई वाणिज्यिक न्यायालय नहीं है।

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए कई उपाय किए हैं। इनमें 181 महिला हेल्पलाइन, सखी वन स्टॉप सेंटर, पीओसीएसओ न्यायालय, चाइल्ड फ्रेंडली पुलिस सेंटर, शिशु मित्र हेल्पलाइन और ई-कोर्ट परियोजना शामिल हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि लोक अदालतों ने पिछले पांच वर्षों में 5,71,226 मामलों का निपटारा किया है, जिससे न्यायिक लंबित मामलों में कमी आई है।

राज्य विधानसभा को यह भी बताया गया कि 13 जुलाई, 2026 तक असम में 7,904 विचाराधीन कैदी थे, जिनमें 1,049 ऐसे कैदी शामिल हैं जिन पर लंबे समय से मुकदमा चल रहा है।

–आईएएनएस

एमएस/

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.