तिरुवनंतपुरम, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता कोडियेरी बालकृष्णन के निधन के चार साल बाद उनके बेटे बिनीश कोडियेरी ने गुरुवार को याद किया कि जब उनके पिता को कई मामलों का सामना करना पड़ा था, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच भी शामिल थी, तो उन्होंने पार्टी का इस्तेमाल ढाल के तौर पर करने से इनकार कर दिया था।
कोडियेरी पोलित ब्यूरो के पूर्व सदस्य थे और राज्य के गृह मंत्री (2006-11) तथा सीपीआई(एम) के राज्य सचिव भी रहे थे।
अपने पिता की चौथी पुण्यतिथि पर एक भावुक पोस्ट में बिनीश ने कहा कि कोडियेरी ने उन्हें साफ कर दिया था कि न तो पार्टी और न ही वे खुद उनका बचाव करेंगे और उन्हें अपनी बेगुनाही खुद साबित करनी होगी।
बिनीश ने बताया कि ईडी के केस की शुरुआत में उनके पिता ने उनसे कहा था, “पार्टी तुम्हारी तरफ से जवाब नहीं देगी। मैं भी तुम्हारी तरफ से जवाब नहीं दूंगा। तुम्हें खुद जवाब देना होगा।”
बिनीश ने कोडियेरी की बात याद करते हुए कहा, “अगर पार्टी तुम्हारी तरफ से जवाब देती है, तो यह हमारे विरोधियों के लिए पार्टी पर हमला करने का हथियार बन जाएगा। तुम जितना ज्यादा सफाई दोगे, यह उतना ही ज्यादा चर्चा का विषय बनेगा। इसलिए, अगर तुम बेगुनाह हो तो तुम्हें खुद इसे साबित करना होगा। तुम्हें कोई समर्थन नहीं मिलेगा।”
बिनीश ने कहा कि समय के साथ इन शब्दों का उनके लिए गहरा अर्थ हो गया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने खुद और अपने परिवार पर लगे आरोपों और हमलों का बिना पार्टी को सुरक्षा कवच बनाए सामना किया।
बिनीश ने बताया कि जब वे खुद जेल में थे, तब भी कोडियेरी का यही कहना था कि उन्हें आरोपों का सामना खुद करना चाहिए।
यह बात ऐसे समय में याद की जा रही है जब पिनाराई विजयन की बेटी वीना विजयन से जुड़े सीएमआरएल-एक्सलॉजिक लेन-देन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच केरल में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है।
ईडी ने इस मामले में आगे की कार्रवाई की मांग की है जबकि पिनाराई ने आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया है। बिनीश ने अपनी पोस्ट में मौजूदा विवाद का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया है।
हालांकि इस बात पर उनका बार-बार जोर देना कि उनके पिता ने कभी भी उनके बचाव के लिए पार्टी का इस्तेमाल नहीं किया, एक वरिष्ठ सीपीआई(एम) नेता के परिवार से जुड़े आरोपों से निपटने के मौजूदा राजनीतिक विवाद के बिल्कुल उलट है।
बिनीश ने कहा कि उन्होंने जीवनभर अपने पिता की सलाह का पालन किया है। उन्होंने कहा, “मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैंने उस सिद्धांत का पूरी तरह से पालन किया है।”
उन्होंने याद किया कि जब कुछ लोगों ने कथित तौर पर उनके पिता से संपर्क करके जेल से रिहाई के बदले राजनीतिक समझौता करने का प्रस्ताव दिया, तो कोडियेरी ने उसे ठुकरा दिया।
बिनीश ने अपने पिता की बात दोहराते हुए कहा, “अगर मेरे बेटे को जेल से बाहर आने के लिए आपसे हाथ मिलाना पड़े, तो उसे जीवनभर जेल में ही रहने दो।”
बिनीश के लिए कोडियेरी के राजनीतिक जीवन का सबसे अहम सबक यही रहा कि न तो निजी मुश्किलें और न ही बेटे की जेल की सजा उन्हें पार्टी के राजनीतिक रुख से समझौता करने के लिए मजबूर कर सकी।
–आईएएनएस
एससीएच/पीएम
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