बेंगलुरु, 5 जून (आईएएनएस)। वरिष्ठ भाजपा नेता और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कर्नाटक सरकार में कैबिनेट विभागों के बंटवारे को लेकर चल रहे आंतरिक मतभेदों और असंतोष के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला।
आर. अशोक ने कांग्रेस नेताओं के बीच असंतोष का जिक्र करते हुए सत्ताधारी पार्टी की स्थिरता पर सवाल उठाए। उन्होंने कुछ मंत्रियों के इस्तीफे और विभाग बंटवारे को लेकर उनके सार्वजनिक असंतोष पर भी टिप्पणी की।
सत्ताधारी पार्टी के अंदरूनी झगड़ों पर तंज कसते हुए आर. अशोक ने कहा, “कर्नाटक के लोग शायद एक दिन ऐसी सुबह देखें जब सूरज न निकले, लेकिन ऐसा दिन कभी नहीं आएगा जब कर्नाटक में कांग्रेस के अंदरूनी झगड़े न हों।”
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार का कार्यकाल अभी दो साल और बाकी है, इसलिए राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को बेंगलुरु में एक स्थायी कार्यालय किराए पर ले लेना चाहिए या इससे भी बेहतर एक घर खरीद लेना चाहिए क्योंकि पार्टी के अंदरूनी झगड़ों को सुलझाने के लिए केंद्रीय नेताओं का बार-बार दखल हो रहा है।
उन्होंने शीर्ष नेताओं के बार-बार दौरे करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य कांग्रेस के भीतर चल रही सत्ता की खींचतान को सुलझाने के लिए बार-बार दौरे करने की कोई जरूरत नहीं है।
उन्होंने मंत्रियों की उन टिप्पणियों का भी जिक्र किया जिनमें उन्होंने विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष जताया था। इनमें वरिष्ठ नेता केएच मुनियप्पा और रामलिंगा रेड्डी के बयान भी शामिल थे, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें सौंपे गए विभागों को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लीडरशिप के सार्वजनिक दावों के बावजूद कि सब ठीक है, सरकार के कामकाज में अंदरूनी मतभेद साफ दिख रहे थे।
भाजपा नेता ने कहा कि भले ही कांग्रेस नेता बसवन्ना और डॉ. बीआर अंबेडकर जैसे समाज सुधारकों के नाम पर शपथ लेते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद ताकतवर विभागों के लिए होड़ मच जाती है। उन्होंने दावा किया कि समाज कल्याण और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति कल्याण से जुड़े विभागों को नेता सक्रिय रूप से नहीं मांगते और अन्य अहम मंत्रालयों की तुलना में उन्हें कम खुशी से स्वीकार करते हैं।
उन्होंने राज्य कैबिनेट में महिलाओं के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व की ओर भी इशारा किया। अपनी बात खत्म करते हुए अशोक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के सामाजिक न्याय और समाजवाद के दावे उसके अंदरूनी कामकाज से मेल नहीं खाते।
जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को कर्नाटक कैबिनेट से इस्तीफा देने का फैसला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार बेंगलुरु शहरी विभाग के आवंटन के बारे में किए गए वादे से मुकर गए थे। यह घटनाक्रम विभागों के आवंटन के एक दिन बाद हुआ है।
रेड्डी ने कहा कि वह अपना इस्तीफा सौंप देंगे और इसे स्वीकार करना है या नहीं, यह फैसला लीडरशिप पर छोड़ देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार और उनके भाई डीके सुरेश ने उनके घर पर व्यक्तिगत रूप से भरोसा दिलाया था कि वादा पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बार-बार भरोसा दिलाने के बावजूद उन्हें बाद में बेंगलुरु शहरी विभाग के बजाय जल संसाधन विभाग आवंटित किया गया।
यह कहते हुए कि वह अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम जारी नहीं रख सकते, रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह विधायक बने रहेंगे और कांग्रेस पार्टी में ही रहेंगे।
उन्होंने घटनाक्रम पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह अपमान की बात है। मैं कितना सहूं? मैं मीडिया से पूछता हूं, मुझे और क्या करना चाहिए था?
–आईएएनएस
पीएसके/वीसी
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