केरल: मुख्यमंत्री सतीशन बनाम विपक्ष के सतीशन: सत्ता परिवर्तन से धारणाओं में अंतर आया

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तिरुवनंतपुरम, 15 जुलाई (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन द्वारा एडीजीपी एमआर अजित कुमार के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने में देरी से जुड़े विवाद को संभालने का तरीका शासन की बदलती वास्तविकताओं और विपक्ष के नेता से राज्य के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर आने के साथ होने वाली गहन जांच को दर्शाता है। पदभार संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री सतीशन विपक्ष में रहते हुए अपने ही शब्दों के आधार पर परखे जा रहे हैं। ताजा मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के सुरक्षाकर्मियों द्वारा अलाप्पुझा में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोपों की जांच से संबंधित है और आरोप…

तिरुवनंतपुरम, 15 जुलाई (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन द्वारा एडीजीपी एमआर अजित कुमार के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने में देरी से जुड़े विवाद को संभालने का तरीका शासन की बदलती वास्तविकताओं और विपक्ष के नेता से राज्य के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर आने के साथ होने वाली गहन जांच को दर्शाता है।

पदभार संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री सतीशन विपक्ष में रहते हुए अपने ही शब्दों के आधार पर परखे जा रहे हैं।

ताजा मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के सुरक्षाकर्मियों द्वारा अलाप्पुझा में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोपों की जांच से संबंधित है और आरोप है कि बाद में हुई जांच को कथित तौर पर पटरी से उतार दिया गया था।

टेलीविजन चैनलों ने विपक्ष के नेता के रूप में सतीशन के उन कड़े बयानों को बार-बार दिखाया है, जिनमें उन्होंने अजित कुमार के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की थी और उनकी वर्तमान स्थिति को इस बात से विरोधाभासी बताया है कि कानून की उचित प्रक्रिया को अपना काम करने दिया जाना चाहिए।

बुधवार को सवालों की बौछार का सामना करने के बाद इस मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि विशेष जांच दल की रिपोर्ट अभी भी विचाराधीन है और न तो उन्हें और न ही गृह मंत्री को अभी तक अंतिम रिपोर्ट मिली है।

उन्होंने कहा कि प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार को औपचारिक रूप से प्राप्त न हुई रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।

क्या यह रुख में बदलाव है या केवल शासन की जिम्मेदारियों को दर्शाता है, यह बहस का मुख्य बिंदु बन गया है।

विपक्ष के नेता के रूप में सतीशन तत्काल जवाबदेही की मांग कर सकते थे।

हालांकि, मुख्यमंत्री के रूप में प्रत्येक प्रशासनिक निर्णय को कानूनी जांच से गुजरना होगा।

पुलिस महानिदेशक की चयन समिति की बैठक जल्द ही होने वाली है, ऐसे में स्थापित प्रक्रिया को दरकिनार करने वाला कोई भी कदम न्यायिक चुनौती के दायरे में आ सकता है।

मुख्यमंत्री सतीशन का मीडिया के साथ विकसित होता संबंध भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

विपक्ष में रहते हुए उन्होंने पिनाराई विजयन सरकार की पत्रकारों के साथ संवाद सीमित करने के लिए अक्सर आलोचना की थी और वादा किया था कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार प्रेस के साथ नियमित संपर्क बहाल करेगी।

उस वादे को काफी हद तक निभाया गया है। पदभार संभालने के बाद से सतीशन नियमित रूप से कैबिनेट बैठकों के बाद मीडिया को संबोधित करते रहे हैं और नियमित रूप से प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उपलब्ध रहते हैं।

–आईएएनएस

एमएस/

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