नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। पूरे देश में प्रशिक्षित कर्मियों, मानकीकृत प्रोटोकॉल और आपातकालीन देखभाल तक टेक्नोलॉजी-आधारित पहुंच की आवश्यकता को दोहराते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) के लिए न्यूनतम मानकों को लागू करने हेतु एक समय-सीमा के अंदर कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।
अपने आदेश में, जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने दर्ज किया कि गहन देखभाल सेवाओं (आईसीयू) के संगठन और वितरण के लिए दिशा-निर्देश तय करने वाला एक आम सहमति पर आधारित ‘बुनियादी दस्तावेज’ तैयार कर लिया गया है और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस कार्यवाही में परिकल्पित कार्य एक महत्वपूर्ण चरण तक पहुंच गया है।” कोर्ट ने आगे कहा कि ये दिशा-निर्देश “व्यावहारिक, लागू करने योग्य हैं, और एक गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) के लिए न्यूनतम मानक के तौर पर आवश्यक हैं।”
सुनवाई के दौरान, एम्स, टाटा मेमोरियल सेंटर, मेदांता और सर गंगा राम अस्पताल जैसे प्रमुख संस्थानों के कई अग्रणी चिकित्सा विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट की सहायता की और आईसीयू के बुनियादी ढांचे और वितरण प्रणालियों में सुधार के लिए उपाय सुझाए।
इन सुझावों पर संज्ञान लेते हुए, जस्टिस अमनुल्लाह की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि ये सुझाव “अत्यंत व्यावहारिक हैं और उन पर उचित विचार किया जाना चाहिए,” विशेष रूप से वे सुझाव जो समय-सीमा निर्धारित करने, विशेष कर्मियों को प्रशिक्षित करने और चेकलिस्ट के रूप में मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार करने से संबंधित हैं। तकनीकी हस्तक्षेप के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक ‘रियल-टाइम’ (वास्तविक समय) अस्पताल पहुंच प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया।
कोर्ट ने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक जीपीएस-आधारित अस्पताल लोकेटर बनाया जाना चाहिए, ताकि ज़रूरत पड़ने पर जनता मामले की प्रकृति और संबंधित मरीज की स्थिति के आधार पर, निकटतम चिकित्सा सुविधा और वहाँ उपलब्ध सेवाओं की पहचान कर सके।”
एक तत्काल कदम के तौर पर, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों के प्रमुख अतिरिक्त मुख्य सचिव या सचिव, आईसीयू दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए एक ‘यथार्थवादी और व्यावहारिक’ कार्य योजना तैयार करने हेतु एक सप्ताह के अंदर बैठकें आयोजित करें।
जस्टिस अमनुल्लाह की अध्यक्षता वाली बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा, “कोर्ट के अनुसार, चुनौती इस बात को निर्धारित करने में है कि किसे बिल्कुल आवश्यक और अनिवार्य माना जाना चाहिए।” बेंच ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रारंभिक चरण में जनशक्ति और उपकरण/लॉजिस्टिक्स से संबंधित पांच बुनियादी आवश्यकताओं की पहचान करें और उन्हें प्राथमिकता दें।
कोर्ट ने आगे अनिवार्य किया कि इस कार्य में एक स्पष्ट कार्यान्वयन पद्धति और अनुपालन और निगरानी के लिए एक तंत्र तैयार करना शामिल होना चाहिए। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर तैयार की गई रिपोर्टों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा जाएगा, जो बाद में एक साझा राष्ट्रीय रूपरेखा (ब्लूप्रिंट) तैयार करने के लिए सभी हितधारकों की एक संयुक्त बैठक का समन्वय करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, “यह पूरी प्रक्रिया… आज से तीन सप्ताहों के अंदर पूरी कर ली जाएगी।” कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 18 मई को तय की।
एक अहम टिप्पणी में, सुप्रीम कोर्ट ने आईसीयू देखभाल में नर्सिंग स्टाफ के महत्व पर जोर दिया और कहा कि वे मरीजों के साथ ‘दिन-रात’ रहते हैं। इस सुझाव को ‘न सिर्फ व्यावहारिक बल्कि जरूरी भी’ बताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन नर्सिंग काउंसिल और पैरामेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को इस कार्यवाही में पक्षकार बनाया।
कोर्ट ने इन नए शामिल किए गए निकायों को निर्देश दिया कि वे एक योजना पेश करें, जिसमें विस्तार से बताया जाए कि ट्रेनिंग, कोर्स और पाठ्यक्रम को कैसे बेहतर बनाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि स्वास्थ्यकर्मी आईसीयू की स्थितियों को प्रभावी ढंग से संभालने में सक्षम हों।
इसे लागू करने में मदद के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से कहा कि वह इन दिशानिर्देशों को औपचारिक रूप से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक एडवाइजरी के तौर पर जारी करे, और उन्हें, साथ ही बाद की रिपोर्टों को भी, अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करे।
–आईएएनएस
एससीएच
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



