नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को आईपैक पर छापेमारी से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई करेगा। आरोप है कि आईपैक के दफ्तर और को-फाउंडर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई में हस्तक्षेप किया था।
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने 8 जनवरी को आईपैक के कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़ी करोड़ों रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई थी। जेंसी ने आरोप लगाए कि ममता बनर्जी अपने साथ कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को लेकर पहुंची थीं। उन्होंने छापेमारी के दौरान बिना किसी अधिकार के कई अहम सबूत हटा दिए, जिनमें लैपटॉप, मोबाइल फोन और चुनावी डेटा वाले दस्तावेज शामिल थे।
पिछली सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को एक ‘दुखद स्थिति’ करार दिया था। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई थी कि ऐसे मामलों में कोई स्पष्ट कानूनी उपाय मौजूद नहीं हैं, जहां किसी राज्य के उच्च पदस्थ अधिकारी पर केंद्रीय जांच में बाधा डालने का आरोप हो।
ईडी की ओर से इस कथित हस्तक्षेप की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की भी अपील लगाई है। एजेंसी ने तर्क दिया है कि अगर केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई में बाधा डाली जाती है, तो उन्हें बिना किसी कानूनी उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता।
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल सरकार ने इस याचिका की स्वीकार्यता पर ही सवाल उठाया है। राज्य सरकार ने तर्क दिया है कि ईडी, जो कि एक सरकारी विभाग है, मौलिक अधिकारों का दावा नहीं कर सकता और न ही अनुच्छेद 32 का हवाला देकर सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि ये कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और इनका मकसद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करना है।
–आईएएनएस
डीसीएच/
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