चेन्नई निगम में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, रिश्वत और टेंडर अनियमितताओं के आरोप में छह अधिकारी निलंबित

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चेन्नई, 16 जुलाई (आईएएनएस)। ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने रिश्वतखोरी, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों में चार वरिष्ठ अधिकारियों समेत छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। नगर प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। कॉरपोरेशन आयुक्त जी.एस. समीरन ने भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन से जुड़ी कई शिकायतों की प्रारंभिक जांच के बाद निलंबन के आदेश जारी किए। निगम ने सभी छह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी है। वहीं, इनमें से चार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक…

चेन्नई, 16 जुलाई (आईएएनएस)। ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने रिश्वतखोरी, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों में चार वरिष्ठ अधिकारियों समेत छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। नगर प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

कॉरपोरेशन आयुक्त जी.एस. समीरन ने भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन से जुड़ी कई शिकायतों की प्रारंभिक जांच के बाद निलंबन के आदेश जारी किए।

निगम ने सभी छह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी है। वहीं, इनमें से चार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की भी सिफारिश की गई है।

कॉरपोरेशन अधिकारियों के मुताबिक, शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ अधिकारियों ने रिश्वत ली, सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे वसूले, सरकारी धन का दुरुपयोग किया और टेंडर प्रक्रिया व वित्तीय लेनदेन में अनियमितताएं बरतीं।

इन आरोपों की विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है। जिन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य मिलेंगे, उनमें आपराधिक जांच भी आगे बढ़ाई जाएगी।

निलंबित अधिकारियों में मनाली और माधवरम के जोनल स्वास्थ्य अधिकारी भी शामिल हैं। उन्हें 9 जुलाई को करीब 9 लाख रुपये के चिकित्सा उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया गया था।

कॉरपोरेशन का आरोप है कि उपकरणों की खरीद के दौरान फर्जी बिल प्रस्तुत किए गए, जिससे खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और सरकारी धन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस मामले से निगम को वित्तीय नुकसान हुआ या नहीं।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कथित अनियमितताओं में केवल कुछ अधिकारी शामिल थे या फिर अधिकारियों और ठेकेदारों का कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था।

जांच के तहत खरीद से जुड़े दस्तावेज, टेंडर स्वीकृति और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड की भी विस्तार से जांच की जा रही है।

ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने कहा है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। निगम का कहना है कि नागरिकों का विश्वास बनाए रखने के लिए प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सेवा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

–आईएएनएस

डीएससी

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