हैदराबाद, 12 जून (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को समाज से अपील की कि वे बाल श्रम व्यवस्था को खत्म करना अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में लें। मुख्यमंत्री ने यह अपील विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के मौके पर की।
उन्होंने कहा, ”हर बच्चे का बचपन उसका जन्मसिद्ध अधिकार है। पढ़ने, खेलने, खुशी से बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर हर बच्चे का प्राकृतिक अधिकार है। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि बाल श्रम जैसी व्यवस्था, जो इन अधिकारों को छीनती है, समाज में किसी भी रूप में जगह न पाए।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षा, स्वस्थ वातावरण और समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने परिवारों, शिक्षकों, स्वयंसेवी संगठनों, जन प्रतिनिधियों और हर नागरिक से इस लक्ष्य में भागीदार बनने की अपील की।
उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में बाल श्रम को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए और यदि कहीं बच्चे काम करते दिखें तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे को बाल श्रम से बचाना उसके लिए एक नए भविष्य की शुरुआत करने जैसा है।
उन्होंने कहा, ”बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, औजार नहीं। उनके कंधों पर भविष्य की उम्मीदें होनी चाहिए, बोझ नहीं। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम ऐसा तेलंगाना बनाएं जहां हर बच्चा हंसते हुए, सीखते हुए और सपने देखते हुए बड़ा हो।”
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी हर बच्चे के अधिकारों की रक्षा के लिए संकल्प दोहराने की अपील की।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि बचपन सीखने, सपने देखने और आगे बढ़ने के लिए होता है, न कि काम करने के लिए। उन्होंने कहा कि विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर हमें हर बच्चे के अधिकारों की रक्षा करने और ऐसा भारत बनाने का संकल्प लेना चाहिए जहां हर घर तक अवसर पहुंचे।
–आईएएनएस
एएमटी/एएस
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



