हैदराबाद, 22 सितंबर (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को अधिकारियों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के यौन उत्पीड़न पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए ‘ग्रीन चैनल’ के माध्यम से धनराशि जारी करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के कार्यान्वयन पर राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की।
तेलंगाना राज्य के गठन के बाद यह पहली बार था कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इस अधिनियम पर राज्यस्तरीय उच्चस्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, समिति ने अधिनियम के कार्यान्वयन, दर्ज मामलों, जांच, मुकदमे की कार्यवाही, मामलों के निपटारे और पीड़ितों को अब तक प्रदान की गई सहायता एवं पुनर्वास की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि सरकार मानवीय आधार पर यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के उत्थान के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें राज्य के दलित और आदिवासी समूहों को उत्तम चावल और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना शामिल है।
सीएम ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भावना से प्रेरित होकर आगे बढ़ रही है और जनसंख्या के अनुरूप धन का आवंटन कर रही है। ‘इंदिरम्मा’ घरों के कुल लाभार्थियों में दलितों की संख्या 31 प्रतिशत थी और इनमें से 17 प्रतिशत ‘इंदिरम्मा’ घर अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए स्वीकृत किए गए थे।
सरकार राज्य भर में नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के 27.5 लाख छात्रों को नाश्ता भी उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी ने अनुसूचित जनजातियों (एससी और एसटी) को 25 लाख एकड़ भूमि के पट्टे वितरित किए थे, जो ‘इंदिरम्मा’ को अपनी प्रिय माता मानते थे।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा ही जीवन बदल सकती है और जब तक हाशिए पर पड़े समुदायों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने समुदायों से अपने बच्चों को शिक्षा और खेलकूद में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की।
उन्होंने आगे कहा, “आइए, राजनीति से ऊपर उठकर इन समुदायों के विकास के लिए काम करें।”
–आईएएनएस
एएसएच/वीसी
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