मुंबई, 24 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार पर राज्य में खेती-किसानी के गंभीर संकट और सूखे जैसे हालात से निपटने के तरीके को लेकर निशाना साधा।
उद्धव ठाकरे ने सत्ताधारी गठबंधन के जमीनी दौरों को सिर्फ फोटो खिंचवाने का मौका और राजनीतिक दिखावा बताते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र की महायुति सरकार को सीधी चुनौती दी।
उन्होंने पांच मुख्य मांगें रखीं, जिनमें सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) और विदर्भ जैसे सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में कैबिनेट की विशेष बैठकें तुरंत बुलाना और परेशान किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना शामिल है।
उन्होंने कहा, “सूखे से निपटने के उपायों, पीने के पानी के बंटवारे और फसल के नुकसान पर राहत के बारे में चर्चा करने के लिए बिना किसी प्रक्रियात्मक देरी के तुरंत महाराष्ट्र विधानसभा का 2-3 दिन का विशेष सत्र बुलाया जाए।”
प्रशासन के राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के कड़े नियमों पर निर्भरता की आलोचना करते हुए उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार से अपील की कि वह कागजी कार्रवाई की अड़चनों को दरकिनार करे और जमीनी हकीकत के आधार पर आधिकारिक तौर पर सूखे की स्थिति घोषित करे।
उन्होंने पूरी पारदर्शिता और एक विस्तृत रिपोर्ट की मांग की जिसमें यह बताया जाए कि पहले घोषित 31,000 करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज में से कितनी रकम असल में प्रभावित किसानों तक पहुंची है, और साथ ही मौजूदा कृषि ऋण माफी योजना के तहत लाभ पाने वालों की पूरी सूची तुरंत जारी करने की भी मांग की।
उद्धव ठाकरे ने बताया कि उनके कार्यकाल में बिना किसी मुश्किल शर्त के 15 दिनों के अंदर 2 लाख रुपए तक का लोन पूरी तरह माफ कर दिया गया था। उन्होंने फसल बीमा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सरकार से कहा कि वह उन फसल बीमा कंपनियों की जांच करे और उन्हें सख्त सजा दे, जिन्होंने मुआवजे के तौर पर सिर्फ 5 या 21 रुपए के मामूली चेक बांटे। उन्होंने उन चार अहम शर्तों को हटाने की निंदा की जिनसे किसानों की सुरक्षा पर असर पड़ा और बीमा रजिस्ट्रेशन में भारी गिरावट आई।
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए फसल के नुकसान का औपचारिक आकलन (पंचनामा) 5 अक्टूबर के बाद तक टालने पर सवाल उठाया और मदद रोकने के पीछे की वजह पूछी, “किसान मरने की कगार पर हैं, फसलें जल चुकी हैं, मवेशियों के लिए चारा खत्म हो गया है और परिवार कर्ज में डूबे हुए हैं। फिर भी मुख्यमंत्री कहते हैं कि आकलन बाद में शुरू होगा। आप किसका इंतजार कर रहे हैं? आपकी अपनी नजर ही पैमाना होनी चाहिए, साफ दिख रहा है कि किसान पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।”
प्रभावित खेतों के दौरे पर गए मंत्रियों का मजाक उड़ाते हुए ठाकरे ने इसे सिर्फ ‘फोटो खिंचवाने का मौका’ बताया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार के ये दौरे असल में राहत पहुंचाने के लिए हैं या सिर्फ गांवों की तकलीफों को नजरअंदाज करके ‘काजू-बादाम खाने’ के लिए।
उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार को केंद्र से फंड का इंतजार किए बिना 40 से 45 दिनों के अंदर किसानों को आर्थिक मदद देनी चाहिए। सरकार को मंत्रालय में एक खुला डिजिटल डैशबोर्ड बनाना चाहिए जिस पर रोजाना बांटी गई मदद और राहत के उपायों की जानकारी अपडेट होती रहे। साथ ही, किसानों की आत्महत्या रोकने और गांवों से शहरों की ओर बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन को संभालने के लिए ठोस योजनाएं बनानी चाहिए, जिसमें तुरंत रोजगार और अस्थायी रहने की जगह का इंतजाम शामिल हो।”
–आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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