सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर बंसुरी स्वराज ने लिखा, “समय आगे बढ़ता रहता है पर कुछ खालीपन कभी नहीं भरता”

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नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज ने गुरुवार को अपनी मां सुषमा स्वराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि समय आगे बढ़ता रहता है लेकिन कुछ रिक्त स्थान कभी नहीं भर पाते। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मां सुषमा स्वराज। समय आगे बढ़ता रहता है, लेकिन कुछ खालीपन कभी नहीं भरते। आपकी यादें, आपकी शिक्षाएं और आपने मुझमें जो मूल्य स्थापित किए हैं, वे हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करते हैं। आपकी सातवीं पुण्यतिथि पर आपको मेरी सादर श्रद्धांजलि। ओम शांति।” पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारत की सबसे…

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज ने गुरुवार को अपनी मां सुषमा स्वराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि समय आगे बढ़ता रहता है लेकिन कुछ रिक्त स्थान कभी नहीं भर पाते।

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मां सुषमा स्वराज। समय आगे बढ़ता रहता है, लेकिन कुछ खालीपन कभी नहीं भरते। आपकी यादें, आपकी शिक्षाएं और आपने मुझमें जो मूल्य स्थापित किए हैं, वे हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करते हैं। आपकी सातवीं पुण्यतिथि पर आपको मेरी सादर श्रद्धांजलि। ओम शांति।”

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारत की सबसे सम्मानित राजनीतिक नेताओं में से एक हैं, जिन्हें उनकी विशिष्ट सार्वजनिक सेवा, सशक्त भाषण कला और शासन के प्रति दयालु दृष्टिकोण के लिए याद किया जाता है।

14 फरवरी, 1952 को हरियाणा के अंबाला में जन्मीं स्वराज ने पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और कम उम्र से ही छात्र राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेने लगीं। उन्होंने जनता पार्टी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और 1977 में हरियाणा विधानसभा के लिए चुनी गईं, जहां वे राज्य सरकार में सबसे कम उम्र की मंत्रिमंडल मंत्रियों में से एक बनीं।

उन्होंने 1984 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ज्वाइन किया और धीरे-धीरे पार्टी में आगे बढ़ते हुए कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक और संसदीय पदों पर आसीन हुईं। अपने करियर के दौरान, उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा दोनों की सदस्य के रूप में कार्य किया और सूचना एवं प्रसारण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और संसदीय कार्य सहित कई महत्वपूर्ण मंत्री पद संभाले थे।

1998 में, स्वराज ने दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच दिया, हालांकि उनका कार्यकाल संक्षिप्त ही रहा। बाद में वे भाजपा की सबसे प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में से एक बनकर उभरीं और 2009 से 2014 तक लोकसभा में विपक्ष की नेता रहीं।

उनका सबसे उल्लेखनीय कार्यकाल 2014 से 2019 के बीच रहा, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में भारत की विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। इस दौरान, उन्होंने विदेश मंत्रालय को अधिक सुलभ बनाने के लिए व्यापक प्रशंसा अर्जित की और अक्सर विदेशों में कठिनाइयों का सामना कर रहे भारतीयों की सहायता के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया। उनकी त्वरित प्रतिक्रियाओं और नागरिक केंद्रित कूटनीति ने भारत की वैश्विक छवि को बढ़ाया और उन्हें सभी राजनीतिक दलों के बीच प्रशंसा प्राप्त हुई।

2016 में किडनी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का सामना करने के बावजूद, स्वराज जनसेवा के प्रति समर्पित रहीं। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया और उसी वर्ष के अंत में सक्रिय राजनीति से विमुख हो गईं।

सुषमा स्वराज का निधन 6 अगस्त, 2019 को हृदयाघात के कारण हुआ। राष्ट्र के प्रति उनके अपार योगदान को मान्यता देते हुए, उन्हें 2020 में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनकी विरासत राजनीतिक नेताओं और नागरिकों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

–आईएएनएस

एसएके/पीएम

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