यूपीआई चार्ज विवाद: कांग्रेस ने बताया ‘डिजिटल यूटर्न’, ‘आप’ ने गुजरात में विरोध करने की चेतावनी दी

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अहमदाबाद, 16 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के उस फैसले की आलोचना की है, जिसके तहत 15 अक्टूबर से व्यापारियों को 2,000 रुपए से ज्यादा के कुछ खास यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) देना होगा। उन्होंने इसे व्यापारियों पर बोझ बताया है और चेतावनी दी कि अंत में इसका खर्च ग्राहकों पर डाला जा सकता है। गुजरात कांग्रेस के इंचार्ज रणदीप सिंह सुरजेवाला और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने बुधवार को एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि यह कदम एक ‘डिजिटल यूटर्न’ है और राज्य सरकार पर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस…

अहमदाबाद, 16 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के उस फैसले की आलोचना की है, जिसके तहत 15 अक्टूबर से व्यापारियों को 2,000 रुपए से ज्यादा के कुछ खास यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) देना होगा।

उन्होंने इसे व्यापारियों पर बोझ बताया है और चेतावनी दी कि अंत में इसका खर्च ग्राहकों पर डाला जा सकता है।

गुजरात कांग्रेस के इंचार्ज रणदीप सिंह सुरजेवाला और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने बुधवार को एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि यह कदम एक ‘डिजिटल यूटर्न’ है और राज्य सरकार पर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के यूजर्स के साथ धोखा करने का आरोप लगाया।

आम आदमी पार्टी (आप) ने भी इस कदम का विरोध किया। पार्टी के गुजरात ऑर्गनाइजेशनल जनरल सेक्रेटरी मनोज सोरठिया ने इसे ‘शाही फरमान’ कहा और कहा कि जरूरत पड़ने पर उनकी पार्टी सड़कों पर उतरेगी।

यह आलोचना राज्य सरकार के नोटिफिकेशन और उसके बाद नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा घोषित फ्रेमवर्क के बाद आई है।

नई व्यवस्था के तहत 2000 रुपए से ज्यादा के खास पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 75,000 रुपए या उससे ज्यादा के ट्रांजेक्शन के लिए 300 रुपए होगी।

मर्चेंट्स को 2,000 रुपए तक का पेमेंट मुफ्त रहेगा।

पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) ट्रांजैक्शन भी रकम की परवाह किए बिना पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। राज्य सरकार ने कुछ सेक्टर के लिए कम चार्ज भी तय किए हैं।

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती से जुड़े सामानों के लिए 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपए का फ्लैट एमडीआर लगेगा।

कैपिटल-मार्केट ट्रांजैक्शन पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए होगी।

खास स्मॉल-मर्चेंट कैटेगरी के तहत यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपए तक पाने वाले छोटे मर्चेंट्स जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत बने रहेंगे।

वित्त मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि एमडीआर न तो सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स है और न ही ग्राहकों द्वारा दिया जाने वाला चार्ज है।

यह मर्चेंट-साइड चार्ज है, जो पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल लोगों, जैसे बैंकों और पेमेंट-सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बांटा जाता है।

बैंकों को यह पक्का करने की सलाह दी गई है कि मर्चेंट्स एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर न डालें, जबकि यूपीआई ऐप्स को इन पेमेंट्स के लिए प्लेटफॉर्म या छिपे हुए चार्ज लगाने से रोक दिया गया है।

राज्य सरकार का अनुमान है कि लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सोरठिया ने कहा कि अतिरिक्त लागत का असर आखिरकार व्यापारियों पर ही पड़ेगा। उन्होंने कहा, “हमारे देश के रिटेल व्यापारियों का प्रॉफिट मार्जिन मुश्किल से 5 से 7 प्रतिशत है।”

उन्होंने आगे कहा कि 0.4 प्रतिशत एमडीआर से उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और अंततः इसकी भरपाई ग्राहकों से की जा सकती है।

उन्होंने इस नए चार्ज की जरूरत पर भी सवाल उठाया और कहा कि एनपीसीआई पहले से ही एक लाभदायक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर चलाता है।

उन्होंने कहा, “यूपीआई ने डिजिटल ट्रांज़ैक्शन बढ़ाने और वित्तीय गतिविधियों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने में मदद की है, और इन चार्जेज से कुछ यूजर्स वापस कैश के इस्तेमाल की ओर मुड़ सकते हैं।”

कांग्रेस के बयान में भी ऐसी ही बात कही गई, लेकिन उसने आगे बढ़कर यह हिसाब लगाया कि अगर 2026-27 के अनुमानित यूपीआई ट्रांजैक्शन मूल्य का पांच प्रतिशत नए फ्रेमवर्क के दायरे में आता है, तो पी2एम ट्रांजैक्शन पर सालाना 5,040 करोड़ रुपए का संभावित बोझ पड़ सकता है।

उसने यह भी कहा कि भविष्य में दर या दायरे में आने वाली कैटेगरीज के विस्तार से यह बोझ काफी बढ़ सकता है।

हालांकि, सरकार के मौजूदा फ्रेंमवर्क में सभी यूपीआई ट्रांजैक्शन या पी2पी ट्रांसफर पर 0.4 प्रतिशत का चार्ज नहीं लगाया गया है।

केंद्र ने कहा कि नया सिस्टम तेजी से बढ़ते यूपीआई इकोसिस्टम के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल प्रदान करने के साथ-साथ व्यक्तियों और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है।

आरबीआई द्वारा रेगुलेटेड संस्था एनपीसीआई द्वारा विकसित यूपीआई, भारत के रिटेल डिजिटल-पेमेंट सिस्टम की रीढ़ बन गया है।

कांग्रेस ने कहा, “वैल्यू के हिसाब से यूपीआई मार्केट में फोन-पे और गूगल-पे की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत है, जिससे नया एमडीआर फ्रेमवर्क पेमेंट-सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ-साथ बैंकों और व्यापारियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है।”

कांग्रेस के बयान में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या नए फ्रेमवर्क से बड़ी विदेशी-समर्थित पेमेंट कंपनियों को फायदा हो सकता है।

इसलिए, 15 अक्टूबर से होने वाला तत्काल बदलाव यूपीआई यूजर्स पर सामान्य चार्ज के बजाय केवल विशिष्ट मर्चेंट-साइड ट्रांजैक्शन तक ही सीमित है।

–आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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IANS Agency

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