ताडेपल्ली/मार्कपुरम, 29 अगस्त (आईएएनए)। वाईएसआरसीपी नेताओं ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू पर इतिहास को फिर से लिखने और पुला सुब्बैया वेलिगोंडा परियोजना का श्रेय लेने का आरोप लगाया। नेताओं का कहना है कि यह परियोजना मुख्य रूप से पूर्व मुख्यमंत्रियों वाईएस राजशेखर रेड्डी और वाईएस जगन मोहन रेड्डी के शासनकाल में पूरी हुई थी।
वाईएसआरसीपी अभियान विंग के प्रदेश अध्यक्ष काकुमानु राजशेखर ने पूर्व और वर्तमान विधायकों के साथ मार्कपुरम में पत्रकारों से कहा कि नायडू ने 1996 में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी, लेकिन अपने बाद के कार्यकालों में इसे सार्थक रूप से आगे बढ़ाने में विफल रहे।
वाईएसआरसीपी नेताओं ने कहा कि वाईएस राजशेखर रेड्डी ने जलायज्ञम कार्यक्रम के तहत इस परियोजना को पुनर्रचित किया, जिसमें दो सुरंगें, नल्लामाला सागर, तीन बांध, सहायक नहरें और प्रमुख नहरें शामिल थीं। इस परियोजना का उद्देश्य 4.47 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई करना और 30 मंडलों में 15.25 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना था।
वाईएसआरसीपी नेताओं के अनुसार, वाईएसआर के कार्यकाल में शुरू किए गए निर्माण चरण के दौरान 20.33 किलोमीटर सुरंग की खुदाई पूरी हो चुकी थी। नायडू के 2014-19 के कार्यकाल में बार-बार समय सीमा तय किए जाने के बावजूद केवल 6.686 किलोमीटर सुरंग की खुदाई ही हो पाई।
उन्होंने कहा कि शेष 10.568 किलोमीटर कोविड-19 महामारी, तकनीकी चुनौतियों और सुरंग खोदने वाली मशीनों से जुड़ी समस्याओं के बावजूद जगन के कार्यकाल में पूरा किया गया। सुरंग-1 में 2021 में और सुरंग-2 में 2024 में सफलता मिली। इसके बाद जगन ने 6 मार्च, 2024 को दोनों सुरंगों को राष्ट्र को समर्पित किया।
कुल 37.587 किलोमीटर सुरंग की खुदाई में से, वाईएसआरसीपी ने दावा किया कि 30.901 किलोमीटर, यानी 82.2 प्रतिशत, वाईएसआर द्वारा शुरू किए गए चरण और जगन के कार्यकाल के दौरान पूरा किया गया, जबकि नायडू की 2014-19 की सरकार के दौरान यह 17.8 प्रतिशत था।
नेताओं ने फीडर नहर की लाइनिंग और फिनिशिंग के कामों को इस तरह पेश करने पर सवाल उठाया जैसे कि पूरी परियोजना को नए सिरे से शुरू किया गया हो। उन्होंने उद्घाटन से पहले टीगलेरू नहर को पूरा करने और विस्थापित परिवारों के पूर्ण पुनर्वास और पुनर्स्थापन की भी मांग की।
–आईएएनएस
एमएस/
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