हैदराबाद, 26 सितंबर (आईएएनएस)। हैदराबाद के नालसार लॉ विश्वविद्यालय में उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की गई, जिसको लेकर एबीवीपी ने विरोध किया। इस मामले पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।
आईएएनएस से बातचीत करते हुए भाजपा नेता मनमीत सिंह ने कहा, “जेएनयू के पूर्व छात्र और तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद ने 2016 में जेएनयू में दंगे कराने की कोशिश की। कल नालसार लॉ विश्वविद्यालय में ‘आर्ट डॉक्यूमेंट्री’ प्ले करने के नाम पर एक इवेंट ऑर्गनाइज किया गया था। इसकी जानकारी इमेल के माध्यम से विद्यार्थियों को दी गई थी, जबकि विश्वविद्यालय के डीन की ओर से कहा गया कि इसकी अनुमति नहीं ली गई थी। वहां पर उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। उमर खालिद के बारे में दुनिया जानती है कि इसने 2016, 2017 में दिल्ली में क्या-क्या किया था। तेलंगाना में कांग्रेस सरकार में ऐसा किया जा रहा है। मेरा कहना है कि वहां पर ‘हनुमान अंश’ फिल्म दिखाई जाए।”
भाजपा नेता विनूषा ने आईएएनएस से कहा, “हैदराबाद की नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में कुछ छात्रों ने उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई, जिसके बाद एबीवीपी ने विरोध किया। क्या इन छात्रों को पता है कि उमर खालिद कौन है? क्या उन्हें पता है कि उसने अफजल गुरु का समर्थन किया था, जिसे संसद हमले के मामले में दोषी ठहराया गया था? खबर है कि 2013 में अफजल गुरु की याद में एक कार्यक्रम हुआ था, जिसमें “भारत तेरे टुकड़े-टुकड़े करेंगे” और “हर घर से अफजल निकलेगा” जैसे नारे लगाए गए थे।”
विनूषा ने कहा, “क्या इन छात्रों को पता है कि उमर खालिद पर दिल्ली दंगों के मामले में मुकदमा चल रहा है? क्या वे उन लोगों के परिवारों और रिश्तेदारों को जवाब दे सकते हैं जिनकी दिल्ली दंगों में जान चली गई? अदालतें अपना काम कर रही हैं, और ये लॉ के छात्र हैं जो कानूनी व्यवस्था को समझते हैं। देश में 3.7 लाख से ज्यादा विचाराधीन कैदी हैं। उन्होंने उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री दिखाने का फैसला क्यों किया, जिस पर दिल्ली दंगों की साजिश के आरोप हैं, जिसमें 50 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी?”
विनूषा ने कहा, “यूनिवर्सिटी ऐसी जगहें होनी चाहिए जहां युवा दिमाग नए विचार विकसित कर सकें और राष्ट्र-निर्माण में योगदान दे सकें। हालांकि उन्हें ऐसी राजनीति का मंच नहीं बनना चाहिए। क्या ये छात्र उन लोगों के परिवारों को जवाब दे सकते हैं जिनकी दिल्ली दंगों में जान चली गई? क्या उन्हें इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन के मामले के बारे में पता है, जिन पर झूठे आरोप लगाए गए और उन्हें जेल में डाल दिया गया था। एक ऐसी घटना जिसका भारत के क्रायोजेनिक इंजन प्रोग्राम पर असर पड़ा था?”
विनूषा ने कहा, “क्या उन्हें सम्मानित आर्मी ऑफिसर कर्नल पुरोहित के बारे में पता है, जिन्होंने एक ऐसे मामले में नौ साल से ज्यादा जेल में बिताए जिसमें उन्हें आखिरकार राहत मिली? इन लोगों को आखिरकार न्याय मिला। ये छात्र लॉ के छात्र हैं और उन्हें कानूनी व्यवस्था का महत्व समझना चाहिए। उन्हें व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहिए और आतंकवाद का समर्थन नहीं करना चाहिए।”
–आईएएनएस
एसडी/वीसी
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