दुनिया से कितना तेल और गैस आयात करता है भारत, 2024-25 के आंकड़ों से समझे पूरा समीकरण!

Summary :

India Energy Imports: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के कई देशों में तेल आपूर्ति पर दिखाई देने लगा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका असर भारत पर भी पड़ा है, जहां 20 मार्च को प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 2.09 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। तेल, जिसे अक्सर “काला सोना” कहा जाता है, हमारे रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्सा है—चाहे वह रसोई गैस हो, वाहनों का ईंधन या उद्योगों…

India Energy Imports: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के कई देशों में तेल आपूर्ति पर दिखाई देने लगा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका असर भारत पर भी पड़ा है, जहां 20 मार्च को प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 2.09 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

तेल, जिसे अक्सर “काला सोना” कहा जाता है, हमारे रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्सा है—चाहे वह रसोई गैस हो, वाहनों का ईंधन या उद्योगों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश में तेल और गैस का घरेलू उत्पादन सीमित है, इसलिए अधिकांश जरूरतें विदेशों से पूरी की जाती हैं। हाल के वर्षों में यह निर्भरता लगातार बनी हुई है।

India Energy Imports: कच्चे तेल का आयात

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 से 88 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान देश ने करीब 232.5 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात किया। अगर दैनिक खपत की बात करें, तो भारत रोजाना लगभग 55 लाख बैरल तेल इस्तेमाल करता है।

तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में रूस सबसे आगे है, जिससे भारत करीब 37 से 40 प्रतिशत तेल खरीदता है। इसके अलावा इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी महत्वपूर्ण सप्लायर हैं। इन देशों पर निर्भरता के कारण मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित करता है।

प्राकृतिक गैस की स्थिति

भारत में प्राकृतिक गैस की खपत भी लगातार बढ़ रही है। देश में रोजाना करीब 189 मिलियन घन मीटर गैस की जरूरत होती है। हालांकि, इसका लगभग आधा हिस्सा ही घरेलू उत्पादन से पूरा हो पाता है, जो करीब 97.5 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है। बाकी जरूरतें आयात के जरिए पूरी की जाती हैं, जो मुख्य रूप से LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) के रूप में आती है। भारत अपनी LNG का लगभग 47 से 50 प्रतिशत हिस्सा कतर से मंगाता है। इसके अलावा अमेरिका, UAE और ओमान भी गैस के प्रमुख स्रोत हैं।

LPG (रसोई गैस) पर निर्भरता

रसोई गैस यानी एलपीजी के मामले में भी भारत आयात पर काफी हद तक निर्भर है। देश अपनी कुल खपत का करीब 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से मंगाता है। इसमें से लगभग 90 प्रतिशत सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से होकर आती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। अगर इस रास्ते में कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक बाजार और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है।

यह भी पढ़ें: दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने पीएम मोदी की एआई तस्वीर मामले में बिहार से आरोपी को किया गिरफ्तार

Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।