मुंबई, 7 जून (आईएएनएस)। शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने रविवार को पश्चिम बंगाल में मदरसों के सर्वे, बिहार की राजधानी पटना स्थित खान ग्लोबल कोचिंग की जांच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और इंडिया गठबंधन के भीतर चल रहे तनाव पर टिप्पणी की।
पश्चिम बंगाल में मदरसों के सर्वे को लेकर कृष्णा हेगड़े ने कहा कि राज्य सरकार को यह जानने का अधिकार है कि मान्यता प्राप्त संस्थानों में किस प्रकार की गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के शासनकाल में बड़ी संख्या में मदरसे स्थापित हुए। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वहां केवल शिक्षा ही दी जा रही है। जिला प्रशासन को जांच और सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं कि वहां क्या पढ़ाया जा रहा है और किस प्रकार की गतिविधियां संचालित हो रही हैं। जिला प्रशासन की रिपोर्ट मिलने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार आगे का निर्णय लेगी।
पटना स्थित खान ग्लोबल कोचिंग की जांच के संबंध में शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर भवन की सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन मानकों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी सामने आई है कि कोचिंग संस्थान की बिल्डिंग का सेफ्टी ऑडिट नहीं हुआ है और कुछ अनियमितताएं पाई गई हैं। फायर कंप्लायंस से जुड़े मुद्दों पर नगर निगम ने खान सर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जवाब मिलने के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ दिन पहले खान सर के परिचितों और विरोधियों के बीच कथित फायरिंग की घटना की भी चर्चा हुई थी, जिसकी जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कृष्णा हेगड़े ने उनका बचाव करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान पूरी कोशिश कर रहे हैं कि शिक्षा प्रणाली में जहां-जहां कमियां हैं, उन्हें दूर किया जाए। परीक्षा प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों की जांच की जा रही है और आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है। शिक्षा मंत्रालय में जो अन्य सुधार आवश्यक हैं, उन्हें लागू करने के लिए भी वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं।
वहीं, इंडिया गठबंधन के भीतर कथित मतभेदों को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा। कृष्णा हेगड़े ने कहा कि डीएमके कई वर्षों तक कांग्रेस की सहयोगी रही है, लेकिन कांग्रेस एक अवसरवादी पार्टी की तरह व्यवहार कर रही है। तमिलनाडु और अन्य राज्यों में उसके फैसलों से सहयोगी दलों में नाराजगी बढ़ी है।
उन्होंने दावा किया कि डीएमके इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं होगी और झारखंड में राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर भी सहयोगी दलों में असंतोष है। उन्होंने कहा कि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि इंडिया गठबंधन के भीतर दरार बढ़ रही है। कांग्रेस एक तरफ सहयोगियों के साथ गठबंधन करती है, वहीं दूसरी ओर राज्यों में अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देती है। अब गठबंधन के अन्य दल भी इस स्थिति को समझने लगे हैं।
–आईएएनएस
पीएसके
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