India LPG and Crude Oil Shipments: मिडिल ईस्ट जुंग का असर पूरी दुनिया में है। ईंधन और तेल की किल्लत ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। भारत में भी LPG की किल्लत को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। लेकिन अब गैस की किल्लत ख़त्म होने वाली है, क्योंकि होर्मुज का सीना चीरकर एलपीजी और तेल से भरे भारत के दो जहाज आज भारत पहुंचने वाले हैं।
एलपीजी लेकर भारतीय जहाज ‘नंदा देवी’ भारत पहुंच चुका है और तेल लेकर ‘जग लाडकी’ पहुंचने वाला हैं। ये दोनों जहाज कतर से एलपीजी और तेल लेकर रवाना हुए थे, मगर होर्मुज में फंस गए थे। भारत और ईरान के बीच बातचीत के बाद ये दोनों भारत के लिए रवाना हुए। इससे पहले सोमवार को ‘शिवालिक’ जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत पंहुचा था।
India LPG and Crude Oil Shipments: भारत को ईरान से अच्छे रिश्तों का मिला फायदा
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। यह रास्ता वैश्विक तेल और LNG व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है। इस बीच भारत को ईरान से अच्छे रिश्तों का फायदा मिला है। सरकार तेहरान के संपर्क में है ताकि क्षेत्र में फंसे 20 से ज्यादा भारतीय जहाजों को सुरक्षित वापस लाया जा सके। सोमवार को ‘शिवालिक’ नाम का एक जहाज भारत पहुंच चुका है और आज दो अन्य जहाज भी सुरक्षित लौट रहे हैं।
LPG Tanker Nanda Devi: एलपीजी लेकर भारत पहुंच चुका है नंदा देवी

14 मार्च, शनिवार को भारतीय ध्वज वाले दो LPG जहाज- ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करने में सफल रहे। ‘शिवालिक’ सोमवार को भारत आ चुका है और इसके बाद ‘नंदा देवी’ भी आज भारत पहुंच चुका है। तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ भी आज भारत पहुंचेगा। भारत सरकार के शिपिंग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने इस ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय कच्चे तेल का टैंकर ‘जग लाड़की’ भी अब सुरक्षित है।
Tanker Crosses State of Hormuz: 81,000 टन मुरबन कच्चा तेल लेकर आ रहा है ‘जग लाड़की’
उन्होंने बताया कि ‘भारतीय ध्वज वाला जहाज ‘जग लाड़की’, जो 14 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात से रवाना हुआ था, लगभग 81,000 टन मुरबन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहा है। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। वो कल तक मुंद्रा पोर्ट पहुंच जाएंगे।’
इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष कि वजह से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का यह संकरा समुद्री रास्ता युद्ध क्षेत्र में बदल गया है। भारत इसी रास्ते से अपना बहुत सारा तेल और गैस आयात करता है, इसलिए शिपिंग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।
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