आईओएस सागर की म्यांमार में एंट्री, द्विपक्षीय समुद्री सहयोग को बढ़ावा

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नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना का इंडियन ओशन शिप (आईओएस) सागर म्यांमार के यांगून बंदरगाह पर पहुंचा गया है। भारतीय नौसैनिक शिप की यह यात्रा क्षेत्र में भारत की निरंतर समुद्री सहभागिता और सहयोगात्मक रणनीति का हिस्सा है। खास बात यह है कि यांगून बंदरगाह पर यह पोर्ट कॉल भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की म्यांमार यात्रा के साथ हो रहा है। नौसेना प्रमुख की म्यांमार यात्रा भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने के प्रयासों को दर्शाता है। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 2 से 5 मई तक…

नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना का इंडियन ओशन शिप (आईओएस) सागर म्यांमार के यांगून बंदरगाह पर पहुंचा गया है। भारतीय नौसैनिक शिप की यह यात्रा क्षेत्र में भारत की निरंतर समुद्री सहभागिता और सहयोगात्मक रणनीति का हिस्सा है।

खास बात यह है कि यांगून बंदरगाह पर यह पोर्ट कॉल भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की म्यांमार यात्रा के साथ हो रहा है। नौसेना प्रमुख की म्यांमार यात्रा भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने के प्रयासों को दर्शाता है।

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 2 से 5 मई तक की म्यांमार यात्रा पर हैं। यहां उन्होंने म्यांमार नौसेना के कमांडर-इन-चीफ एडमिरल ह्तेन विन के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की है। इससे पहले म्यांमार नौसेना द्वारा भारतीय नौसेना प्रमुख को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

नौसेना प्रमुख का यह दौरा भारतीय नौसेना और म्यांमार नौसेना के बीच बढ़ते और मजबूत हो रहे समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। नौसेना प्रमुख व म्यांमार के वरिष्ठ नेतृत्व के बीच यहां विभिन्न स्तरों पर बातचीत हो रही है। इसमें द्विपक्षीय समुद्री सहयोग की समीक्षा, परिचालन स्तर पर तालमेल को मजबूत करने और दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री साझेदारी और सहयोगात्मक जुड़ाव को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराती है।

साथ ही, इसका उद्देश्य नौसैनिक सहयोग को मजबूत करना, समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना और आपसी विकास तथा क्षेत्रीय स्थिरता को प्रोत्साहित करना है। वहीं यांगून पहुंचने पर म्यांमार नौसेना द्वारा आईओएस सागर का पारंपरिक और औपचारिक स्वागत किया गया।

इस पड़ाव के दौरान म्यांमार नौसेना आईओएस सागर के चालक दल की मेजबानी करेगी। इसके तहत दोनों देशों के आधिकारिक के बीच महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर अनुभवों और सांस्कृतिक समझ का आदान-प्रदान करना है।

इसके अलावा, इस पोर्ट कॉल के दौरान म्यांमार नौसेना के प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा भी प्रस्तावित है। यहां दोनों पक्षों के बीच संचालन और प्रशिक्षण से जुड़ी सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा किया जाएगा।

साथ ही, दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जानी हैं। नौसेना का मानना है कि ऐसी विभिन्न गतिविधियों से आपसी सहयोग और सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा।

दरअसल आईओएस सागर की यह तैनाती भारत की ‘महासागर’ (क्षेत्र में सुरक्षा के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) विजन के अनुरूप है। यह भारतीय नौसेना की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है, जिसके तहत वह हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा और साझेदारी को बढ़ावा दे रही है।

यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के भी अनुरूप है। पड़ोसी प्रथम नीति का उद्देश्य क्षेत्रीय देशों के साथ मजबूत और स्थायी संबंध स्थापित करना है।

–आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी

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