12 लोगों की लिस्ट थमाई, कहा- सबको नौकरी से निकाल दो, सालों से साथ काम करने वाले कर्मचारियों को लेकर भावुक हुआ IT मैनेजर

Summary :

एक IT मैनेजर की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जहां उसे 12 कर्मचारियों की लिस्ट थमाकर सभी को नौकरी से निकालने का आदेश दिया गया। सालों से साथ काम कर रहे इन कर्मचारियों के साथ उसके भावनात्मक रिश्ते जुड़ चुके थे। ऐसे में उन्हें नौकरी से निकालने की जिम्मेदारी मिलने पर मैनेजर भावुक हो गया। आखिर कंपनी ने ऐसा फैसला क्यों लिया और मैनेजर ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी? जानिए पूरी कहानी।

अगर आप किसी कंपनी में सालों से काम कर रहे हैं, तो वहां का माहौल धीरे-धीरे घर जैसा लगने लगता है। आपके सहकर्मियों के साथ दोस्ती हो जाती है। रोज़ साथ बैठना, खाना-पीना और एक-दूसरे की मदद करना आपकी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाता है। आपको लगता है कि सब कुछ हमेशा ऐसे ही चलता रहेगा। लेकिन फिर, ज़रा सोचिए—एक दिन अचानक आपको एक ईमेल मिलता है जिसमें आपको HR से मिलने के लिए कहा जाता है। आपको बताया जाता है कि आज आपका आखिरी दिन है और कल से आपको ऑफिस आने की जरूरत नहीं है।

बता दें कि यह खबर किसी भी कर्मचारी को अंदर तक तोड़ सकती है। इसके अलावा, एक HR प्रोफेशनल के लिए भी , भले ही वह आपका अच्छा दोस्त क्यों न हो। किसी सहकर्मी को यह बताना आसान नहीं होता कि उसे नौकरी से निकाला जा रहा है। ऐसे फैसले बहुत मुश्किल होते हैं; न सिर्फ उस कर्मचारी के लिए जिसे निकाला जा रहा है, बल्कि उस व्यक्ति के लिए भी जिसे यह खबर देनी पड़ती है।

12 लोगों की लिस्ट थमाई, कहा- शुक्रवार तक सबको निकाल दो

IT Manager Emotional Layoffs (credit-google)

ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। चेन्नई की एक IT कंपनी में डिलीवरी मैनेजर के तौर पर काम करने वाले एक शख्स ने Reddit पर अपना अनुभव साझा किया है। उसने बताया कि कंपनी के बड़े अधिकारियों ने उसे मीटिंग में बुलाया और 12 कर्मचारियों के नाम की लिस्ट थमा दी। साथ ही कहा कि शुक्रवार तक इन सभी लोगों को नौकरी से निकालना है। हर कर्मचारी से बात करने के लिए सिर्फ 15 मिनट का समय दिया गया था।

सबसे दुख की बात यह थी कि ये सभी कर्मचारी साल 2016 से उसके साथ काम कर रहे थे। वे उसके लिए सिर्फ ऑफिस के साथी नहीं, बल्कि परिवार जैसे बन चुके थे। टीम के लोग उसे प्यार से ‘अन्ना’ यानी बड़ा भाई कहकर बुलाते थे। मैनेजर ने बताया कि इन 12 कर्मचारियों में किसी ने हाल ही में घर खरीदने के लिए होम लोन लिया था, तो किसी के परिवार में कोई गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। एक कर्मचारी की मां कैंसर से पीड़ित थीं और उनका इलाज कंपनी के हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर था। वहीं, एक कर्मचारी की पत्नी अगले महीने बच्चे को जन्म देने वाली थी।

बड़े अधिकारी लेते हैं फैसला, लेकिन अपनों को बताना पड़ता है

मैनेजर ने बताया कि इन कर्मचारियों ने कंपनी के लिए छुट्टियों और वीकेंड पर भी काम किया था। कई बार रात के तीन बजे तक ऑफिस में रुककर प्रोजेक्ट पूरे किए थे। अब उन्हीं लोगों को नौकरी से निकालने की जिम्मेदारी उसे दे दी गई थी। उसने बताया कि नौकरी से निकालने का फैसला कंपनी के बड़े अधिकारी लेते हैं, लेकिन कर्मचारियों को यह खबर देने की जिम्मेदारी मैनेजरों को दे दी जाती है।

ऐसे में सबसे ज्यादा मुश्किल उस व्यक्ति के लिए होती है, जिसे अपने ही साथ काम करने वाले लोगों को बताना पड़ता है कि अब उनकी नौकरी नहीं रही। उसने इस जिम्मेदारी से बचने के लिए नौकरी छोड़ने तक के बारे में सोचा। लेकिन उसकी पत्नी ने समझाया कि अगर वह नौकरी छोड़ देगा, तो उसकी जगह कोई दूसरा यह काम करेगा और परिवार की आमदनी पर भी असर पड़ेगा। Reddit पर साझा किए गए इस अनुभव के बाद प्राइवेट कंपनियों में नौकरी की सुरक्षा और कर्मचारियों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।