नई दिल्ली: देश में वोटर लिस्ट के SIR को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विदेशी फंडिंग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को विदेशी पैसे और भारत-विरोधी ताकतों का समर्थन मिल रहा है। बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संस्थापक आशुतोष रांका का नाम लेते हुए उनकी फंडिंग पर सवाल उठाए। हालांकि, ये आरोप मंत्री की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि अभिजीत दीपके को अमेरिका में रहने वाले कुछ लोगों से आर्थिक मदद मिल रही है। वहीं, उन्होंने दावा किया कि आशुतोष रांका को पाकिस्तानी राजनेताओं से पैसा मिला है। मंत्री का कहना है कि , रांका अपने संपर्कों और हैंडलर्स के जरिए भी आर्थिक मदद प्राप्त कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि इन लोगों ने खुद को नेता घोषित कर लिया है, जबकि उनके पास मिलने वाले पैसों के स्रोतों को लेकर कई सवाल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनका समर्थन करने वाले कुछ संगठन देश के अंदर और विदेशों में एक्टिव हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि SIR के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के पीछे केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि कुछ ऐसे संगठन भी हैं जो भारत के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
🚨 BIG BREAKING FROM UNION MINISTER DR. JITENDRA SINGH
Speaking in Bengaluru on November 3, he alleged that Abhijeet Dipke received funding from US based donors, while Ashutosh Ranka was allegedly paid by Pakistani politicians and their handlers.
He also accused foreign funded NGOs, deep state operatives and anti India organisations of attempting to manufacture a narrative around India’s electoral process.
Such matter deserves thorough investigation and transparency.
India’s democratic institutions and electoral processes must remain protected from any unlawful foreign interference.
🪳 it’s done 👊 https://t.co/AN6TAMLefr
— CA Anurag (@CAAnurag_) November 5, 2026
एसआईआर के विरोध के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने का दावा
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी नेताओं और भारत-विरोधी संगठनों की ओर से SIR के खिलाफ अभियान को आर्थिक मदद दी जा रही है। उनके मुताबिक, कुछ समूह इस मुद्दे पर गलत जानकारी फैलाकर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि एसआईआर को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान से जुड़े लोगों की विश्वसनीयता और उनके आर्थिक स्रोतों की जांच की जानी चाहिए। मंत्री के अनुसार, राजनीतिक रूप से कमजोर हो रहे कुछ लोग जनता के बीच गलत संदेश फैलाकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी फंडिंग का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जितेंद्र सिंह ने SIR विरोधी अभियान में शामिल एक महिला कार्यकर्ता का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस महिला को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पैसे मिल रहे थे। लेकिन, मंत्री ने इस महिला का नाम और फंडिंग से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने केवल इतना कहा कि इस तरह के मामलों की जांच होनी चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अभियान चलाने के लिए पैसा कहां से आ रहा है।
जितेंद्र सिंह ने विदेशी फंडिंग के मामले में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह कानून विदेशी स्रोतों से मिलने वाले पैसों पर निगरानी रखने और उनके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए बनाया गया है। मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी फंडेड एनजीओ और भारत-विरोधी संगठन मिलकर एसआईआर के खिलाफ गलत प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में फंडिंग के स्रोतों और पैसा जुटाने के तरीकों की जांच जरूरी है।
फंडिंग के स्रोतों की जांच की मांग
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि SIR के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों को मिलने वाली आर्थिक मदद की पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए। उनके मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले डोनर्स, पाकिस्तानी राजनेताओं और अन्य कथित स्रोतों से मिलने वाले पैसों की जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक अभियान के पीछे विदेशी पैसे का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। मंत्री के इन आरोपों से एसआईआर को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद और गहरा होने की संभावना है।


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