नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। भारत अपनी स्वतंत्रता के 80 साल पूरे होने के अवसर पर जश्न मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर ध्वजारोहण करने के बाद 13वीं बार देशवासियों को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “2014 से पहले, यानी आज से 12 साल पहले, हमारे देश में पाइप से गैस पहुंचाने की सुविधा सिर्फ 70 शहरों में थी। इन 12 सालों में हमने इसे 700 शहरों तक बढ़ाया है। इसे ही रफ़्तार कहते हैं। इसे ही बड़े पैमाने पर काम करना कहते हैं। 2014 से पहले, पाइप वाली गैस मुश्किल से 20 से 22 लाख घरों तक पहुंचती थी। आज ये लगभग 1.75 करोड़ घरों तक पहुंच रही है। बारह साल पहले, देश की सोलर एनर्जी क्षमता सिर्फ 2 गीगावाट थी। आज हमने 160 गीगावाट का लक्ष्य हासिल कर लिया है। हमने इस बात पर भी पूरा ध्यान दिया है कि इसका फायदा देश के मिडिल क्लास और आम परिवारों तक पहुंचे। हमने ‘पीएम सूर्य घर,मुफ्त बिजली योजना’ शुरू की। आज, मुझे खुशी है कि इतने कम समय में हमने 50 लाख घरों में सोलर एनर्जी अपनाने का माइलस्टोन पार कर लिया है, और यह काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं, “मेरे प्यारे देशवासियों, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश में रेलवे के विद्युतीकरण का काम 1925 में ही शुरू हो गया था। लेकिन 90 सालों में, 1925 से लेकर 90 सालों तक रेलवे नेटवर्क का सिर्फ़ 30 फीसदी हिस्सा ही विद्युतीकृत हो पाया था। 90 सालों में 30 फीसदी बनाम 10 सालों में 70 फीसदी! नतीजे देने का मतलब यही होता है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “पिछले 10-12 सालों से हम 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए लगातार आगे बढ़ रहे हैं और एक के बाद एक मील का पत्थर हासिल कर रहे हैं। हमने कभी नहीं सोचा था कि इस सफर में हमें ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। पिछले 10-12 सालों में देखिए, हमें कितने संकटों का सामना करना पड़ा! कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने पूरी दुनिया को गहरी चिंता में डाल दिया और हर जगह सिस्टम चरमरा गए। जैसे ही हम कोरोना से बाहर निकले, युद्ध की भयावह खबरें आने लगीं। एक तरफ यूक्रेन और दूसरी तरफ पश्चिम एशिया। हर तरफ तनाव का माहौल था। कौन जानता है कि भविष्य बताने वालों ने क्या-क्या डरावनी बातें कही थीं! देश को डराना, लोगों को भयभीत और चिंतित रखना- कुछ लोगों को ऐसा करने में बहुत मजा आता था। वे कहते थे, ‘वैक्सीन नहीं मिलेगी, लोग कोविड से नहीं बचेंगे; कुछ भी अच्छा नहीं होगा।’
प्रधानमंत्री ने कहा, “जब पश्चिम एशिया का संकट आया, तो अफवाह फैलाई गईं। ‘पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल नहीं मिलेगा, गैस नहीं मिलेगी, डीजल नहीं मिलेगा, खाद नहीं मिलेगी।’ दुनिया भर से तरह-तरह की अफवाह फैलाकर कुछ लोगों को भारत के लोगों को डराने, भयभीत करने और चिंता में डुबोने में मज़ा आता था। लेकिन देश ने देखा कि पिछले 10-12 सालों में हमारी सोच-समझकर बनाई गई नीतियों और योजनाओं का कैसा अच्छा नतीजा निकला। ‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र को अपनाते हुए, भारत ने जो पहले से तैयारियां की थीं और जो कदम उठाए थे, वे काम आए। हमने ऐसे संकटों की उम्मीद नहीं की थी, फिर भी संकट के समय वे सभी इंतजाम असरदार साबित हुए। और आज, देश में गैस, पेट्रोल और यूरिया की पर्याप्त सप्लाई है। हम अपनी ताकत के दम पर गर्व से खड़े हैं और आगे बढ़ रहे हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “एक समय था जब मैंने ‘आत्मनिर्भरता’ की बात की थी और एयर-कंडीशन्ड कमरों में बैठे कुछ लोग हमें बता रहे थे कि ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण) का क्या होगा। लेकिन पिछले दशक पर नज़र डालें—तो ऐसा लगता है जैसे दुनिया ने ग्लोबलाइजेशन के बारे में बात करना ही छोड़ दिया है। जो आवाजें कभी ग्लोबलाइजेशन की वकालत करती थीं, वे अब शांत हो गई हैं। दुनिया भर के सभी देश अब अपने हितों को संभालने और उनकी रक्षा करने की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, संकट के इस दौर में, कुछ देशों ने अपना दबदबा दिखाने के लिए संसाधनों को हथियार बनाने का खेल खेला है। दुनिया अपने पास मौजूद हर चीज़ को हथियार बनाने में लगी है—संसाधनों को हथियार बनाना: पेट्रोल, डीजल, खाद, दवाइयां, टेक्नोलॉजी चिप्स, और इतना ही नहीं, यहां तक कि इलाकों (टेरिटरी) को भी हथियार बनाया जा रहा है! ऐसे समय में, अगर हम पिछले 10 सालों से ‘आत्मनिर्भरता’ के मंत्र से प्रेरित होकर सही दिशा में आगे न बढ़े होते, तो हम आसानी से कल्पना कर सकते हैं कि हम ऐसी बड़ी चुनौतियों का सामना कैसे करते।”
–आईएएनएस
ओपी/एएस
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)



Download Android App
Download iOS App



