नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। 21 मार्च सिर्फ कैलेंडर में एक तारीख नहीं है, बल्कि एक जागरूकता और समर्थन का संदेश है। हर साल इसी दिन दुनिया भर में विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य डाउन सिंड्रोम के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इससे प्रभावित लोगों को समाज में समान मान-सम्मान दिलाना है ताकि वो खुद को दूसरों से अलग समझकर दुखी न हों।
डाउन सिंड्रोम तब होता है, जब किसी बच्चे के शरीर में क्रोमोसोम (गुणसूत्र) 21 की एक अतिरिक्त प्रति होती है। इसका मतलब है कि उनकी जीन संरचना सामान्य से थोड़ी अलग होती है। इस वजह से सीखने की क्षमता, शारीरिक विशेषताएं और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
दुनिया के हर हिस्से में यह स्थिति पाई जाती है और यह हमेशा से मानव जीवन का हिस्सा रही है। इसी के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 21 मार्च को विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस मनाया जाता है।
डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों और वयस्कों को सही देखभाल, स्वास्थ्य सुविधाएं, जल्दी हस्तक्षेप वाले कार्यक्रम और समावेशी शिक्षा की जरूरत होती है। इन सबके जरिए ही उनका जीवन बेहतर और खुशहाल बन सकता है। उनके लिए विशेष शिक्षा, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, व्यावसायिक थेरेपी और मानसिक स्वास्थ्य का समर्थन बेहद जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली ने दिसंबर 2011 में 21 मार्च को विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस घोषित किया। 2012 से यह दिन पूरे विश्व में मनाया जाने लगा। इसका उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि समाज में समान अवसर, समर्थन और समावेश सुनिश्चित करना भी है।
डाउन सिंड्रोम के आंकड़े भी बताते हैं कि यह स्थिति दुर्लभ नहीं है। हर 1,000 से 1,100 जन्मों में लगभग 1 बच्चा इस स्थिति के साथ पैदा होता है। इसका मतलब है कि हर साल दुनिया भर में करीब 3,000 से 5,000 बच्चे डाउन सिंड्रोम के साथ जन्म लेते हैं।
ऐसे में उनका जीवन बेहतर बनाने के लिए आवश्यक है कि उन्हें सही समय पर चिकित्सकीय देखभाल और समाज में सही जगह मिले। यह न सिर्फ उनके लिए, बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए लाभकारी होता है। सही मार्गदर्शन, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल से ये बच्चे अपने जीवन में अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकते हैं।
2026 का विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस ‘अकेलेपन के खिलाफ एक साथ’ थीम पर आधारित है। इस अभियान का संदेश यह है कि केवल किसी के मौजूद होने का मतलब यह नहीं कि वह समाज में समान रूप से शामिल है। असली समावेश वह है, जहां व्यक्ति को यह महसूस हो कि वह समाज का हिस्सा है, उसका सम्मान है और वह जुड़ा हुआ है।
–आईएएनएस
पीआईएम/एबीएम
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



