LPG Black Marketing: ईरान युद्ध के बाद एलपीजी सिलेंडर को लेकर बना संकट केन्द्र सरकार और दिल्ली सरकार के लाख दावों के बावजूद कहीं न कहीं लोगों को प्रभावित कर रहा है। दरअसल केवाईसी पूरी न होने से उपभोक्ताओं को बिना प्रक्रिया पूरी किए सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं और ऊपर से 25 दिनों का लॉकिंग पीरियड भी लागू है। ऐसे में बाजार में अवैध रूप से बिकने वाले सिलेंडर सीमित हो गए हैं। इस वजह से गैस रिफिल करने वाले मोटा मुनाफा कमा रहे हैं और जो लोग छोटे सिलेंडरों पर आश्रित हैं, वे महंगी गैस खरीदने को मजबूर हैं। आलम यह है कि जिन पांच किलो के सिलेंडर में पहले 80 रुपए प्रति किलो की दर से गैस भरी जाती थी, वही गैस अब 300 रुपए प्रति किलो तक भरी जा रही है। मसलन तीन से चार गुणा अधिक दाम पर अवैध रूप से एलपीजी गैस बेची जा रही है।
गैस एजेंसियों पर उमड़ती भीड़
ईरान युद्ध से पहले एलपीजी सिलेंडर लेने वाले उपभोक्ताओं को बुकिंग पर सामान्य तौर पर सिलेंडर उपलब्ध हो रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे युद्ध का समय और बढ़ा हालात भी बदलते गए। गैस एजेंसियां लंबे समय से उपभोक्ताओं को एसएमएस और अन्य साधनों से केवाईसी पूरी करने के लिए बार-बार आग्रह करती आ रही थीं, लेकिन युद्ध की आशंका को भांपते हुए केवाईसी को लेकर सख्ती कर दी गई। ऐसे में उपभोक्ताओं की जमावड़ा गैस एजेंसी पर दिखने लगा।
इसके बावजूद बिना कनेक्शन यानी अवैध रूप से गैस सिलेंडर लेने वाले या रिफिल करवाने वालों के लिए भी सिलेंडर मिल पानी आसान नहीं रह गया है। आम उपभोक्ता को जहां कनेक्शन से नंबर आने पर 913 रुपए में सिलेंडर उपलब्ध हो रहा है, वही कालाबाजारी से 3 हजार रुपए से ऊपर तक उपलब्ध हो रहा है और उसके लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। कुछ उपभोक्ता जिनका इस्तेमाल कम होता था, पहले वे भी अपना सिलेंडर किसी जरूरतमंद को बुक कर उपलब्ध करवा देते थे, लेकिन 25 दिनों का लॉकिंग पीरियड और एक माह में एक सिलेंडर की अनिवार्यता से किसी को सिलेंडर उपलब्ध करवाने का रास्ता भी बंद हो चुका है। वहीं जिनके पास दो सिलेंडर हैं, उन उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग का लॉकिंग पीरियड 35 दिनों का है।
मजदूर तबके पर महंगाई की मार
आमतौर पर मजदूर, दूसरे राज्यों से आकर किराये के मकान में रहने वाले और रोजमर्रा बाजार में जाकर रेहड़ी-पटरी लगाने वालों को अक्सर छोटे एलपीजी सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। ऐसे में जो मजदूर बिना परिवार रहते हैं, वे भी रात में छोटे सिलेंडर पर खाना पकाकर अपना गुजारा करते हैं। मगर सिलेंडर की कालाबाजारी पर सरकार के प्रहार करने से एक तरफ जहां कालाबाजारी पर काफी हद तक रोक लगी है, वहीं दूसरी ओर अभी भी सिलेंडर का जुगाड़ करने वाले 913 रुपए के घरेलू सिलेंडर को 3 हजार रुपए से अधिक का बेक रहे हैं। वहीं छोटे सिलेंडर रिफिल करने वालों ने एक किलो गैस जो पहले 80 रुपए में भरते थे अब उसका दाम प्रति किलो 300 रुपए या उससे अधिक कर दिया। ये काम भी अब खुले में नहीं, बल्कि चोरी छिपे ही हो पा रहा है। छोटे सिलेंडर महंगे होने से काफी हद तक मजदूर अपने घरों को पलायन कर चुके हैं।
घरेलू बनाम कमर्शियल
वहीं जो मजदूर रेहड़ी या अनधिकृत कॉलोनियों में फल-सब्जी या दूसरे जरूरत के सामान साप्ताहिक बाजार में बेचते थे, उनके लिए भी लाले पड़ गए हैं। ऐसे में उन्होंने भी फिलहाल काम बंद कर अपने घरों को जाना ही बेहतर समझा है। किस सिलेंडर में होती है कितनी गैस घरेलू एलपीजी सिलेंडर में 14 किलो गैस होती है। वहीं छोटा सिलेंडर यदि पांच किलो का है तो उसमें 300 रुपए प्रति किलो गैस भरी जा रही है। इस हिसाब से 4200 रुपए में 14 किलो गैस कालाबाजारी कर बेची जा रही है, हालांकि कालाबाजारी करने वालों को भी सिलेंडर मुश्किल से दो से ढाई हजार में उपलब्ध हो पा रहा है। वहीं कमर्शल सिलेंडर में 19 किलो गैस होती है जिसकी कीमत करीब 2078 रुपए है, वह ब्लैक में 6 हजार रुपए में मिल पा रहा है। इसकी खपत होटल, रेस्तरां, कैटरर्स और हलवाइयों को पड़ती है।
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