भोपाल : मध्यप्रदेश में वन विभाग द्वारा किये जा रहे प्रयासों से बाघों की संख्या बढ़ रही है। वन विभाग ने किशोर होते बाघों को वर्चस्व की लड़ाई और मानव द्वंद से बचाने के लिये अनुकूल वातावरण का निर्माण कर बाघों को ऐसे अभयारण्यों में शिफ्ट कर रहा है, जहां वर्तमान में बाघ नहीं हैं। वनमंडलाधिकारी रमेशचन्द विश्वकर्मा ने बताया कि वन विभाग ने पन्ना में बाघ पुनर्स्थापना के बाद सीधी के संजय टाइगर रिजर्व में भी 6 बाघों का सफल स्थानांतरण किया है।
पन्ना में लगभग 30 बाघ हैं। विभाग अब नौरादेही अभयारण्य में बाघ पुनर्स्थापना के कार्य में लगा हुआ है। प्रदेश जल्द ही उड़ीसा के सतकोसिया अभयारण्य को भी 3 जोड़े बाघ देगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार जबलपुर से 140 किलोमीटर दूर दमोह, सागर और नरसिंहपुर जिले में 1197 वर्ग किलोमीटर में फैले नौरादेही अभयारण्य में बाघों की स्थानांनरित किया जायेगा। इस अभयारण्य के देश की दो बड़ी नदियों गंगा और नर्मदा का कछार पर होने के कारण यहां पानी की कमी नहीं है।
वन विभाग ने पन्ना की तर्ज पर इस अभयारण्य में बाघों को आबाद करना शुरू कर दिया है। पिछले 18 अप्रैल को यहां कान्हा से ढ़ई वर्षीय एक बाघिन और 29 अप्रैल को बांधवगढ़ से लगभग पांच वर्षीय बाघ का स्थानांतरण किया गया है। इसके लिये नौरादेही की वन विभाग की टीम ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की टीम के साथ मिलकर मात्र तीन दिनों में दोनों के लिये विशेष रूप से अलग-अलग बाड़े तैयार किया है। प्रबंधन ने इन्हें एन-1 और एन-2 का नाम दिया है। दोनों बाघों को लोग राधा एवं किसन के नाम से पुकारते हैं। दोनों नये वातावरण में रम गये हैं। विभाग इनकी गतिविधियों पर निगरानी रखे हुये है।
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