गौतमबुद्धनगर, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम कानूनों के उल्लंघन पर श्रम विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की। विभाग ने 24 कारखानों से जुड़े कुल 203 संविदाकारों के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, साथ ही संबंधित एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की जा रही है।
अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी के अनुसार, हाल ही में श्रमिकों के आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़ की घटनाओं में कुछ संविदाकारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच में यह भी सामने आया कि कई संविदाकार श्रम कानूनों का पालन नहीं कर रहे थे और श्रमिकों को उनके वैधानिक अधिकारों एवं हितलाभों से वंचित रखा जा रहा था। इसी आधार पर विभाग ने इन संविदाकारों को नोटिस जारी करते हुए लगभग 1 करोड़ 16 लाख 5 हजार रुपए की राशि श्रमिकों को भुगतान करने का आदेश दिया है।
श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह राशि श्रमिकों के बकाया वेतन और अन्य लाभों के रूप में उन्हें दी जानी है। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया जाता है, तो संबंधित संविदाकारों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। साथ ही अन्य संदिग्ध संविदाकारों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कठोर कदम उठाने की तैयारी चल रही है।
वहीं, श्रमिकों की लंबे समय से चल रही वेतन वृद्धि की मांग को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया है। शासन स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश के बाद गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी, और इसका भुगतान 7 से 10 मई 2026 के बीच किया जाएगा।
श्रम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई वेतन दरें संविदा और स्थायी दोनों प्रकार के श्रमिकों पर समान रूप से लागू होंगी। कर्मचारियों के वेतन से केवल ईपीएफ और ईएसआई की ही कटौती मान्य होगी, इसके अलावा किसी भी प्रकार की कटौती गैरकानूनी मानी जाएगी। इसके अतिरिक्त श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से, साथ ही बोनस और ग्रेच्युटी जैसे लाभ भी दिए जाएंगे।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई संविदाकार समय पर वेतन भुगतान नहीं करता या कम भुगतान करता है, तो उसके खिलाफ न केवल लाइसेंस रद्द किया जाएगा बल्कि उसे ब्लैकलिस्ट कर न्यायालय में अभियोजन भी चलाया जाएगा।
–आईएएनएस
पीकेटी/एएमटी
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