PM Modi Assam Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रुगढ़-मोरान हाईवे पर पूर्वोत्तर भारत की पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा का उद्घाटन किया। इस मौके पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टरों ने हवाई प्रदर्शन भी किया। यह सुविधा आपातकालीन परिस्थितियों में सैन्य और नागरिक विमानों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
PM Modi in Dibrugarh: असम में पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा का उद्घाटन

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरन में नेशनल हाईवे पर आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) का उद्घाटन किया। यह पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की पहली आपातकालीन लैंडिंग सुविधा है। प्रधानमंत्री मोदी वायुसेना के विमान से ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जो आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) पर उतरा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पीएम मोदी का मंच पर स्वागत किया।
PM Modi News Today: मोरान हाईवे पर PM मोदी, राफेल-सुखोई का दमदार एयर शो

उद्घाटन के बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना का एक एयर शो भी देखा। एयर शो में राफेल, सुखोई और मिग फाइटर एयरक्राफ्ट शामिल थे। फाइटर एयरक्राफ्ट ने हाईवे स्ट्रिप पर सफलतापूर्वक उड़ान भरी और लैंड किया। इस ऐतिहासिक क्षण को देखने के लिए कम से कम एक लाख लोग इकट्ठा हुए। पीएम मोदी को मोरन आपातकालीन लैंडिंग सुविधा के महत्व पर एक प्रेजेंटेशन दिखाई गई। भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पीएम मोदी को इसकी जानकारी दी।
PM Modi Assam Visit: 4.2 किमी इमरजेंसी रनवे, 74 टन तक के विमान की लैंडिंग संभव
एक सरकारी बयान के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर बनाई गई ईएलएफ को 40 टन तक वजन वाले फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ-साथ 74 टन तक के मैक्सिमम टेक-ऑफ वजन वाले ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को रखने के लिए डिजाइन किया गया है। 4.2 किमी लंबे मजबूत कंक्रीट वाले हिस्से को मिलिट्री और सिविलियन दोनों तरह के एयरक्राफ्ट को हैंडल करने में सक्षम इमरजेंसी रनवे के तौर पर बनाया गया है।
भारत-चीन सीमा के पास मोरन ELF, बिना डिवाइडर बना स्ट्रेटेजिक रनवे

मोरन ईएलएफ की एक खास बात यह है कि इसमें बीच में रोड डिवाइडर नहीं है, जिससे लैंडिंग और टेक-ऑफ ऑपरेशन के दौरान एयरक्राफ्ट आसानी से आ-जा सकते हैं। भारत-चीन सीमा से नजदीकी इसकी स्ट्रेटेजिक अहमियत को और बढ़ा देती है। ऊपरी असम में मोरन ईएलएफ को पूर्वोत्तर में भारत के सैन्य बुनियादी ढांचे में प्रमुख रणनीतिक वृद्धि के तौर पर देखा जा रहा है। इससे भारतीय वायुसेना को उस इलाके में ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी, जहां हाल के सालों में तनाव बढ़ा है।
यह भी पढ़ें: पुलवामा हमले की बरसी: PM Modi ने किया शहीद जवानों को याद, खड़गे-शरद पवार ने भी दी श्रद्धांजलि




















