PM Modi Vadodara visit : गुजरात के वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के मैदान पर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों और Gen-Z युवाओं के बीच पीएम मोदी ने करीब 35,000 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
इस दौरान उन्होंने 2,800 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क का काम पूरा होने का ऐलान करते हुए इसे 21वीं सदी के भारत के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने शहर की स्वच्छता और नागरिकों के सेवाभाव की तारीफ करते हुए वडोदरावासियों का धन्यवाद भी व्यक्त किया।
अटकी फाइलों की रफ्तार बदली
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यूपीए शासनकाल पर निशाना साधा और बताया कि 2004 में फ्रेट कॉरिडोर पर विचार हुआ और 2006 में कंपनी बनी, लेकिन 2014 तक फाइलें सिर्फ अटकती, लटकती और भटकती रहीं। 2014 के बाद उनकी सरकार ने काम को गति दी और आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर देश के व्यापार-कारोबार की रीढ़ बन चुके हैं।
पीएम ने बताया कि पहले जहां मालगाड़ी 6.30 घंटे में 100 किमी चलती थी, अब वही सफर आधे से भी कम समय में तय हो जाता है। आज इन कॉरिडोर पर रोजाना 430 से ज्यादा मालगाड़ियां दौड़ रही हैं।
‘नाराज फूफा’ वाला तंज
इस बीच ऐसा भी आया जब उन्होंने विपक्ष पर ‘नाराज फूफा’ वाली तंज फिर से कसा। बता दें, मुंबई से वडोदरा तक डबल स्टैक कंटेनर ट्रेन के सफल संचालन का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि एक ही ट्रेन से 250 ट्रकों के बराबर सामान पहुंच गया।
इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अब ‘नाराज फूफा जी’ चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा, लेकिन देश आगे बढ़ रहा है। पीएम ने वडोदरा के 150 साल पुराने औद्योगिक इतिहास को याद करते हुए कहा कि अब यह शहर देश के पहले ‘मेड इन इंडिया’ मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट C-295 के लिए जाना जा रहा है, जिसकी पहली उड़ान इसी शहर ने देखी है।
ट्राइबल इलाकों तक रेल
पीएम मोदी ने साफ किया कि आज देश में विकास की बयार सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के आदिवासी इलाकों को भी रेल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। पहले की तरह सिर्फ एक-दो ट्रेनों का ढोल पीटने के बजाय अब साल भर नई ट्रेनें और बुनियादी ढांचे की योजनाएं जमीन पर उतर रही हैं।
उन्होंने लाल किले से दिए ‘सप्तधारा’ के विजन को दोहराते हुए कहा कि गतिशक्ति और मैन्युफैक्चरिंग से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा।
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