मोची और नाई का बढ़ा कद! अपने कौशल के दम पर अब इन नामों से होगी इनकी पहचान

Summary :

PM Vishwakarma Scheme Update: केंद्र सरकार ने जातिगत मुद्दों को लेकर एक अहम फैसला लिया है। दरअसल उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने पीएम विश्वकर्मा योजना को और अधिक समावेशी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। समिति का मानना है कि पारंपरिक पेशों को जाति से जोड़कर देखने की बजाय उनके कौशल और कार्यक्षेत्र के आधार पर पहचान दी जानी चाहिए। PM Vishwakarma Scheme Update: पेशों के नाम में बदलाव की आवश्यकता मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय समिति ने यह भी कहा कि योजना में शामिल कई पेशों के नाम ऐसे हैं जो किसी विशेष जाति या क्षेत्र से…

PM Vishwakarma Scheme Update: केंद्र सरकार ने जातिगत मुद्दों को लेकर एक अहम फैसला लिया है। दरअसल उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने पीएम विश्वकर्मा योजना को और अधिक समावेशी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। समिति का मानना है कि पारंपरिक पेशों को जाति से जोड़कर देखने की बजाय उनके कौशल और कार्यक्षेत्र के आधार पर पहचान दी जानी चाहिए।

PM Vishwakarma Scheme Update: पेशों के नाम में बदलाव की आवश्यकता

PM Vishwakarma Scheme Update
PM Vishwakarma Scheme Update (Source: Social Media)

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय समिति ने यह भी कहा कि योजना में शामिल कई पेशों के नाम ऐसे हैं जो किसी विशेष जाति या क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। यह स्थिति योजना की व्यापक स्वीकार्यता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए समिति ने सुझाव दिया है कि पेशों के नाम बदलकर उन्हें पेशेवर और तटस्थ बनाया जाए।

उदाहरण के तौर पर:

  • मोची (Cobbler) के बजाय जूते का कारीगर
  • कुम्हार (Potter) के बजाय सिरेमिक और मिट्टी के उत्पाद निर्माता
  • नाई (Barber) के बजाय व्यक्तिगत सौंदर्य सेवा प्रदाता

इन बदलावों से पारंपरिक पेशों की पहचान जाति से अलग होकर कौशल और कार्य पर आधारित होगी। इससे इन पेशों को पूरे देश में समान रूप से स्वीकार्यता मिलेगी।

PM Vishwakarma Scheme 2026: बजट में कटौती पर चिंता

PM Vishwakarma Scheme 2026
PM Vishwakarma Scheme 2026

संसदीय समिति ने वर्ष 2026-27 के बजट में पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए आवंटन घटाकर 3,860.89 करोड़ रुपये किए जाने पर चिंता व्यक्त की है। पिछले वर्ष 2025-26 में यह बजट लगभग 25,100 करोड़ रुपये था। समिति का मानना है कि योजना की लोकप्रियता और अधिक पंजीकरण को देखते हुए इतनी बड़ी कटौती सही नहीं है और इसकी तत्काल समीक्षा की जानी चाहिए।

कौशल आधारित पहचान को बढ़ावा

समिति ने कहा कि पेशों को जाति या क्षेत्र से जोड़कर देखने की बजाय, उनके कौशल और पेशेवर योग्यता के आधार पर पहचान दी जानी चाहिए। इससे पारंपरिक कारीगरों को सम्मान मिलेगा और उन्हें नए उद्यमी बनने के अवसर भी मिलेंगे। यह कदम योजना को आधुनिक और पेशेवर दृष्टिकोण के अनुरूप बनाएगा।

मानकीकृत पेशों की सूची

संसदीय समिति ने सरकार से सिफारिश की है कि राज्यों और सामाजिक विशेषज्ञों के परामर्श से योजना में शामिल पेशों की नई और मानकीकृत सूची तैयार की जाए। यह सूची पूरे देश में समान रूप से लागू की जा सके। इससे योजना की समावेशिता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ेंगी।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

विशेषज्ञों का मानना है कि पेशों के नाम में यह बदलाव पारंपरिक कारीगरों को सामाजिक सम्मान देगा। साथ ही, यह उन्हें आधुनिक व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करेगा। इस बदलाव से योजना न केवल समावेशी बनेगी बल्कि देशभर में इसे समान रूप से अपनाया जा सकेगा।

इस तरह संसदीय समिति की सिफारिशों का उद्देश्य पीएम विश्वकर्मा योजना को जातिगत पहचान से दूर करना और कौशल-आधारित पहचान को बढ़ावा देना है। यदि इन सुझावों को लागू किया जाता है, तो यह योजना देश के सभी पारंपरिक कारीगरों के लिए और अधिक सम्मानजनक और उपयोगी साबित होगी।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।