अटल जी के कद-गरिमा ने मुझे सार्वजनिक जीवन के प्रति किया आकर्षित : रामनाथ कोविंद

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 वाजपेयी के निधन पर शोक जताते हुए रामनाथ कोविंद ने अटल की दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्य को लिखे पत्र में कहा कि उनके साथ काम करना एक अविस्मरणीय अनुभव था।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन को आज अपने लिए निजी क्षति करार दिया और कहा कि यह वाजपेयी का कद और गरिमा ही थी जिसने उन्हें कानूनी पेशा त्यागकर सार्वजनिक जीवन में आने को आकर्षित किया। वाजपेयी के निधन पर शोक जताते हुए राष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री की दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्य को लिखे पत्र में कहा कि उनके साथ काम करना एक अविस्मरणीय अनुभव था।

अटल की दत्तक पुत्री नमिता को रामनाथ कोविंद ने लिखा पत्र

रामनाथ कोविंद ने पत्र में कहा, “अटल जी का निधन आपके और घर में अन्य सदस्यों के लिए एक निजी क्षति है। यह मेरे लिए भी एक निजी क्षति है। यह उनका कद और गरिमा थी जिसने मुझे सार्वजनिक जीवन के प्रति आकर्षित किया, क्योंकि मैंने उनका सहकर्मी बनने के लिए कानूनी पेशा त्याग दिया।”

रामनाथ कोविंद बोले – वाजपेयी के निधन से देश के लाखों घरों ने क्षति महसूस की

रामनाथ कोविंद ने कहा, “वर्षों बाद, राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद जब मैंने उनसे मुलाकात की तो वह बिस्तर पर थे, लेकिन उनकी आंखों की हलचल से जवाब मिला। मैंने महसूस किया कि उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया है।”  राष्ट्रपति ने कहा कि वाजपेयी के निधन से देश के लाखों घरों ने क्षति महसूस की है।

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रामनाथ कोविंद ने कहा, “वह हमारे अत्यंत लोकप्रिय पूर्व प्रधानमंत्री, दुर्लभ विशिष्टता वाले राष्ट्रीय नेता और आधुनिक भारत के राजनेता थे। उन्होंने अपने लंबे और असाधारण सार्वजनिक जीवन में अनगिनत तरीकों से असंख्य लोगों को प्रभावित किया-स्वतंत्रता सेनानी और बुद्धिजीवी के रूप में, लेखक और कवि के रूप में, सांसद और प्रशासक के रूप में और अंतत: प्रधानमंत्री के रूप में। वह भारतीय राजनीति में नवजागरण करने वाले सच्चे व्यक्ति थे।”

राष्ट्रपति ने कहा कि जीवन से भी बड़े हृदय वाले नेता के निधन से हुई क्षति न केवल भारत में, बल्कि विश्व में भी महसूस की जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री अटल जी दबाव में भी न झुकने तथा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्णायक नेतृत्व का एक उदाहरण थे। 1998 के परमाणु परीक्षण, 1999 के करगिल युद्ध में विजय, उनकी सरकार में आर्थिक बदलाव, प्रगति एवं विकास-उनका कार्यकाल उपलब्धियों से भरा रहा।

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रामनाथ कोविंद ने पत्र में लिखा, “कृपया एक बार फिर मेरी सांत्वना स्वीकार करें और इसे अटल जी के अनगिनत मित्रों तथा प्रशंसकों तक पहुंचाएं। ईश्वर आपको और परिवार के अन्य सदस्यों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति एवं साहस प्रदान करें।”

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