मुंबई, 19 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने एक बार फिर रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए ‘मराठी अनिवार्य’ करने के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि किसी गरीब कामगार की रोजी-रोटी सिर्फ इसलिए छीन लेना या उसे परेशान करना क्योंकि उसे स्थानीय भाषा पूरी तरह नहीं आती, मुंबई की मूल भावना के खिलाफ है।
रामदास आठवले ने कहा, “मुझे मराठी भाषा पर बहुत गर्व है और मेरा दृढ़ता से मानना है कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी जरूर सीखनी चाहिए, क्योंकि यह इस राज्य की आत्मा और हमारी समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है। लेकिन इसके साथ ही हमें यह भी समझना होगा कि मुंबई सिर्फ एक राज्य की राजधानी नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक राजधानी और एक तेजी से उभरता हुआ वैश्विक शहर है।”
उन्होंने कहा कि मुंबई में सिर्फ देश के अलग-अलग कोनों से ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से लोग अपने सपने, रोजगार और उम्मीदें लेकर आते हैं। मुंबई की असली पहचान और इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी विविधता और हर किसी को खुले दिल से अपनाने की क्षमता में बसी है।
आठवले ने कहा, “वैश्विक और समावेशी वास्तविकता को देखते हुए रोजगार या ऑटो-रिक्शा परमिट के लिए ‘मराठी अनिवार्य’ करने जैसे सख्त कानून थोपना अनुचित लगता है। किसी गरीब कामगार की रोजी-रोटी सिर्फ इसलिए छीन लेना या उसे परेशान करना, क्योंकि उसे स्थानीय भाषा पूरी तरह नहीं आती, मुंबई की मूल भावना के खिलाफ है।”
उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा का सम्मान और प्रचार-प्रसार जरूर करना चाहिए, लेकिन इसे रोजगार की शर्त या सजा बनाकर नहीं। भाषा हमेशा लोगों को जोड़ने का माध्यम होनी चाहिए, विभाजन का नहीं, ताकि मुंबई बिना किसी भाषाई भेदभाव के भारत की धड़कन बनकर आगे बढ़ती रहे।
बता दें कि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम-1988 के तहत महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम- 2026 को लागू करने के लिए आधिकारिक शासनादेश जारी किया।
संशोधित नियमों के तहत जिन चालकों के पास मराठी बोलने का व्यावहारिक कौशल या कामकाजी ज्ञान नहीं होगा, उन्हें पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। अगर चालक एक महीने के भीतर मराठी सीखने में असफल रहता है तो उसके लाइसेंस का प्राधिकरण तीन महीने तक के लिए निलंबित किया जा सकता है। निलंबन के बाद भी नियमों का पालन नहीं करने पर ड्राइविंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।
–आईएएनएस
डीसीएच/
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