Rupee Hit Record Lows Against Dollar : भारतीय रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। बाजार खुलते ही रुपया 92 के अहम स्तर को पार कर गया और गिरते-गिरते 92.36 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। आर्थिक विशेषज्ञ इसे भारत के लिए एक चेतावनी की तरह देख रहे हैं, क्योंकि रुपये की कमजोरी का सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर आम लोगों के खर्च तक पर पड़ सकता है।
Rupee Hit Record Lows Against Dollar: कितनी गिरावट दर्ज हुई

गुरुवार सुबह बाजार खुलने के साथ ही रुपया करीब 92.25 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। हालांकि थोड़ी ही देर में इसमें और गिरावट आई और यह 92.36 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी दिन की तुलना में यह लगभग 31 पैसे की गिरावट है। लगातार कमजोर होते रुपये ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मगर उससे अधिक चिंता आम लोगों की बढ़ेगी जिस पर इस का असर पड़ने वाला है।
Rupee Hit All Time Low: क्यों कमजोर हो रहा है रुपया

विशेषज्ञों के अनुसार रुपये की गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। इसका सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बीते दिनों ब्रेंट क्रूड लगभग 10 प्रतिशत उछलकर 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। पश्चिमी एशिया में फेले युद्ध के तनाव के चलते यह स्थिति खराब होती जा रही है।
Rupee Hit All Time Low: अन्तराष्ट्रीय आयात पर पड़ता है असर

बता दें, भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर तेल कंपनियों को ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ जाता है। वैश्विक अनिश्चितता और मजबूत डॉलर दोनों ही भारत के लिए बुरे संकेत हैं। वैश्विक तनाव बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश मानते हैं। ऐसे माहौल में डॉलर की मांग बढ़ती है और बाकी देशों की मुद्राएं कमजोर होने लगती हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
बीते दिनों ही फ़ॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला है। बुधवार को ही उन्होंने करीब 6,267 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। जिस कारण शेयर मार्केट पर भी काफी ज्यादा असर हुआ।
मिडिल ईस्ट तनाव का भी असर
यह एक बड़ी समस्या है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों ने ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तेल की खरीद-फरोख्त डॉलर में होती है, इसलिए तेल आयात करने वाली कंपनियों को अधिक डॉलर की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि इस तरह के संकट का असर सीधे रुपये की कीमत पर पड़ता है।
बता दें यह भारतीयों के लिए बिल्कुल भी अच्छी खबर नहीं है कि डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है। रुपये की कमजोरी का असर सिर्फ विदेशी मुद्रा बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है। सीधी सी बात है भारत को बाहर से डॉलर में आयात करते हुए ज्यादा रुपए देने पड़ेंगे। जिसकी भरपाई भारतीयों को झेलनी पड़ेगी।
क्या क्या हो सकता है महंगा
- ईंधन महंगा हो सकता है।
- कच्चा तेल महंगा होने और रुपये के कमजोर होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ जाती है।
- इससे रोजमर्रा के सामानों पर असर पड़ सकता है।
- मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक सामान और विदेश से आने वाले कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
- विदेश यात्रा और पढ़ाई का खर्च बढ़ेगा
- अगर कोई व्यक्ति विदेश में पढ़ाई कर रहा है या विदेश यात्रा की योजना बना रहा है, तो अब उसे हर डॉलर के लिए पहले से ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
आगे क्या हो सकता है
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करके रुपये को स्थिर करने की कोशिश कर सकता है।
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