सांसदों के तृणमूल कांग्रेस छोड़ने पर भाजपा नेताओं का तंज, ‘अब टीएमसी में कुछ नहीं बचा’

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नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। टीएमसी के 20 सांसदों की ओर से ममता बनर्जी का साथ छोड़े जाने पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि ममता बनर्जी ने तानाशाही तरीके से बंगाल और पार्टी को चलाया। उनकी पार्टी में विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं थी। ममता बनर्जी के जंगलराज से लोग नाराज हैं। जनता ने भी सत्ता परिवर्तन किया है। अब बंगाल के मुख्यमंत्री प्रतिदिन सिस्टम परिवर्तन का काम कर रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने…

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। टीएमसी के 20 सांसदों की ओर से ममता बनर्जी का साथ छोड़े जाने पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि ममता बनर्जी ने तानाशाही तरीके से बंगाल और पार्टी को चलाया। उनकी पार्टी में विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं थी। ममता बनर्जी के जंगलराज से लोग नाराज हैं। जनता ने भी सत्ता परिवर्तन किया है। अब बंगाल के मुख्यमंत्री प्रतिदिन सिस्टम परिवर्तन का काम कर रहे हैं।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह ममता बनर्जी की पार्टी की आंतरिक समस्या है। लेकिन मेरा मानना है कि जिसकी पार्टी की कोई विचारधारा नहीं होती है और जिस पार्टी का कोई विजन नहीं होता है, उसका यही हश्र होता है।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि ममता बनर्जी का जनता, विधायकों और सांसदों ने साथ छोड़ा है। कहीं ऐसा न हो कि उनका भतीजा भी साथ छोड़कर भाग जाए। मेरा मानना है कि जो भी जनप्रतिनिधि हैं, वे सभी जनता के प्रति जवाबदेह हैं। उनको यह भी पता है कि किस प्रकार से अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के दिशा-निर्देश पर आम जनता के साथ अत्याचार किया गया है। केवल भाजपा कार्यकर्ताओं की जान नहीं गई है, जनता की भी जान गई है।

भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि टीएमसी में कोई बचा ही नहीं है। उनकी तानाशाही के डर से लोग टीएमसी में थे। बंगाल की जनता के जनादेश के बाद पता चल गया कि जिस तरह से बंगाल की जनता परेशान थी, उसी तरह से पार्टी के लोग भी परेशान थे। तृणमूल कांग्रेस से तृण तो अलग हो गया। 28 में से 20 सांसद चले गए तो तृणमूल कहां बची है?

–आईएएनएस

एसडी/एबीएम

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