सारंगपुर हनुमानजी के नाम और रूपों को मिली कॉपीराइट-ट्रेडमार्क सुरक्षा

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बोटाद, 12 जून (आईएएनएस)। दुनियाभर में मशहूर तीर्थस्थल गुजरात के सारंगपुर देव हनुमानजी महाराज के अलग-अलग दिव्य रूपों, तस्वीरों और आध्यात्मिक अभिव्यक्तियों को अब कानूनी सुरक्षा मिल गई है। कोई भी व्यक्ति या संस्था ट्रस्ट की इजाजत के बिना दादा के नाम, तस्वीरों या आध्यात्मिक विरासत का कमर्शियल इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। मंदिर ट्रस्ट की कोशिशों की वजह से हनुमानजी के नाम, रूपों, तस्वीरों और उनसे जुड़ी बौद्धिक संपदा को रजिस्टर और सुरक्षित किया गया है। देश में पहली बार, सारंगपुर मंदिर ट्रस्ट ने कॉपीराइट और ट्रेडमार्क के जरिए किसी धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा करने की एक अनोखी…

बोटाद, 12 जून (आईएएनएस)। दुनियाभर में मशहूर तीर्थस्थल गुजरात के सारंगपुर देव हनुमानजी महाराज के अलग-अलग दिव्य रूपों, तस्वीरों और आध्यात्मिक अभिव्यक्तियों को अब कानूनी सुरक्षा मिल गई है। कोई भी व्यक्ति या संस्था ट्रस्ट की इजाजत के बिना दादा के नाम, तस्वीरों या आध्यात्मिक विरासत का कमर्शियल इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।

मंदिर ट्रस्ट की कोशिशों की वजह से हनुमानजी के नाम, रूपों, तस्वीरों और उनसे जुड़ी बौद्धिक संपदा को रजिस्टर और सुरक्षित किया गया है। देश में पहली बार, सारंगपुर मंदिर ट्रस्ट ने कॉपीराइट और ट्रेडमार्क के जरिए किसी धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा करने की एक अनोखी पहल की है।

भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को एक मॉडर्न कानूनी फ्रेमवर्क के तहत बचाने के इस ऐतिहासिक फैसले से भक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई। सारंगपुर हनुमानजी मंदिर ट्रस्ट के स्वामी विवेक सागर ने कहा कि हमने सारंगपुर हनुमानजी के नाम और रूपों को कॉपीराइट-ट्रेडमार्क कराया है। इसे हमने हनुमानजी के चरणों में समर्पित किया है।

सारंगपुर ऐतिहासिक श्री कष्टभंजन हनुमानजी मंदिर और बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। सारंगपुर का हनुमानजी मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र रहा है। सारंगपुर का श्री कष्टभंजन हनुमान मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय में अनोखा है, क्योंकि इसमें हनुमान को मुख्य देवता माना जाता है।

श्री हनुमान मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय के वड़ताल गद्दी के अंतर्गत आता है। यह एकमात्र स्वामीनारायण मंदिर है, जिसमें स्वामीनारायण या कृष्ण की मूर्तियां मुख्य देवता के रूप में स्थापित नहीं हैं। यह मंदिर दुखभंजन हनुमान जी को समर्पित है। यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है।

कुछ महीनों पहले लगाई गई 54 फुट की मूर्ति ने मंदिर की पहचान को और बढ़ाया, जो दुनिया भर से भक्तों को आकर्षित करती है। बीएपीएस, सारंगपुर के आत्मतृप्त स्वामी के अनुसार, सारंगपुर में पूज्य संत गोपालानंद स्वामी ने कष्टभंजन देव हनुमान की मूर्ति स्थापित की थी। यह मंदिर अपने आध्यात्मिक महत्व के लिए दुनियाभर में जाना जाता है।

–आईएएनएस

डीसीएच/

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